Hindi

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    चाभी

    मेघना बुझी सी काम कर रही थी । मैं चाय पीने लगा, और मन ही मन सोचने लगा क्या हमारे कर्म ही ही हमारे जीवन की नियति होते हैं ? चाय खत्म कर मन में उसकी खुशी की दुआ कर मैं वहां से निकल गया ।

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    नक़्शे कदम

    जीवन में चाहे कितनी भी कठिन
    परिस्थिति हो, अपनी अलग पहचान बनाना |
    सब से लड़कर , चुनौतियों का सामना करके अपनी एक अलग कहानी सुनाना |

  • पहली मुलाक़ात

    उसे जाते हुए बस में देखता ही रह गया और मैं बस वहीं खड़ा रहा | मैं समझ ही नहीं पाया कि एक पल में अचानक क्या हो गया मैं इतना बेबस कब से हो गया? यह शायद मेरा ही कसूर था कि मेरा दिल आज मेरे हाथों से निकल चुका था | सड़क किनारे खड़ी हुई वह लाल सूट में न जाने मुझ पर ऐसा क्या जादू कर गई, मेरे दिलो-दिमाग पर ऐसी छाई कि मैं होश खो बैठा | कैसी वह कशिश थी, कैसी वह बारिश थी, कैसा मौसम था, कैसा वह समां था | जैसे इश्क़ का अधूरा सा अफ़साना था |

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    KAVITA

    This time on my blog read a Poem by a Sonneteria winner of udbhav’15 & 16  by Prakhar Tiwari Like, Share and Follow his blog for more such poems.  http://ilovetoexpress.blogspot.in/     Paas ho kar door ho gaya.. Sajaya tha jo jaha wo choor ho gaya.. Roz nazar aane wala aaj ek noor ho gaya…..