Hindi

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    बचपन

    कुछ पल ज़िंदगी में ऐसे आते हैं जो दिखने में बहुत छोटे होते हैं,पर दिल में हमेशा के लिए घर बना लेते हैं।ना वो किसी बड़ी जगह पर बिताए जाते हैं,ना उनमें कोई महंगी चीज़ें होती हैं…फिर भी वही पल सबसे ज्यादा अमीर बना जाते हैं। कल सुबह ऐसा ही एक पल मेरी ज़िंदगी में…

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    आदत

    शायद मैं तुम्हें उतना भूल नहीं पाया जितना दिखाया। सच कहूँ? तुम्हारे जाने के बाद मैंने सबसे पहलेअपने आप से झूठ बोलना शुरू किया था। लोगों से नहीं। खुद से। मैंने खुद को समझाया किये बस एक phase है,थोड़ी दूरी है,थोड़ा ego है,थोड़ा silence है। लेकिन अंदर कहीं मुझे शुरू से पता थाकि तुम्हारी कमी…

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    नज़रिया

    कभी-कभी मैं तन्हाइयों में तुमसे बातें करती हूँ। इतनी देर तक…कि तुम्हारी ख़ामोशी भी जवाब देने लगती है। फिर लगता है जैसे तुम्हारा दिल कुछ कहना चाहता है मुझसे।कुछ ऐसा… जो तुमने कभी ज़ुबान से कहा ही नहीं। और शायद इसी लिए मैंने ये सब लिखा है। मेरे दिल से…तुम्हारे दिल के बारे में। उन…

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    RCB

    आज तुम बहुत खुश होगे…RCB आखिरकार जीत गई। मुझे याद है, एक बार तुमने मुझे एक Reel भेजी थी —“महिला मित्र को भेज देता हूँ, क्या पता दिला दे…”और बात RCB की Jersey की हो रही थी। तब मैंने सच में सोचा था कि तुम्हारे लिए वो Jersey मंगवा दूँगी। अब IPL खत्म हो गया…

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    तुझको

    क्या थी मैं…जो एक दिन, एक पल भीतुमसे बात किए बिना नहीं रह पाती थी। और क्या हो गई हूँ आज…कि चालीस दिन बीत गए,और मैं अब भी ज़िंदा हूँ। याद है?कैसे मैं खुद को रोकती थी,तुम्हारे मैसेज ignore करती थी,बार-बार…सिर्फ इसलिए क्योंकि मुझे डर था—अगर एक बार तुम्हारी तरफ पूरी तरह मुड़ गई,तो फिर…

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    अकेला

    कल फिर तुम्हारी याद में मैंने बहुत शराब पी।सुबह से लेकर शाम तक… हर घूंट में बस तुम्हारा नाम था।ऐसा लग रहा था जैसे शराब नहीं, तुम्हारी कमी उतर रही हो मेरे अंदर। दिल के अंदर जैसे कोई दीवार लगातार टूट रही थी।तुम्हारे नाम का हर अक्षर सीने पर खुदता जा रहा था।कानों में शोर…

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    ऐतबार

    कभी कभी दिल चाहता है तुमसे पूछूँ —कैसा रहा यह एक महीना?क्या क्या हुआ इस एक महीने में?क्या तुमने कुछ ऐसा किया जिससे तुम्हें खुशी मिली?कुछ नया हुआ?कुछ अच्छा लगा? कैसे रह लूँ जाने बिना तुम्हारी हर बात?आदत बन गए थे तुम।जिस दिन तुम नहीं दिखते थे ना,मैं उस दिन को गिनती ही नहीं थी।…

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    अजनबी

    आज फिर तुम्हारी याद ने मुझे हर जगह से घेर लिया। दारु भी पी ली तुम्हें भूलाने के लिए…एकदोतीनचार दर्द बढ़ने लगा,आंसू बहने लगे। सोचा था शायद कुछ देर के लिए दिल हल्का हो जाएगा।पर यादें शराब से नहीं धुलतीं।वो और गहरी हो जाती हैं। मैं आज तुम्हें भूलने गई थी,लेकिन हर दीवार पर वही…

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    तारे

    तुम्हारे नज़रिए से सोचती हूँ तो समझ नहीं आता तुम्हें कैसा लगा होगा। मैं शायद ज़्यादा सोचती हूँ… इसलिए वही लिख रही हूँ जो दिल में है, जो बाहर आ ही नहीं पा रहा। हर वक़्त तुम्हें देखने का मन करता है। तुम्हें अपनी बाँहों में भरकर सुलाने का मन करता है। तुम्हारे पूरे चेहरे…

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    मोह

    हाय… इतने दिनों बाद तुम्हें देखकर कितना सुकून आया।तुम्हारी हँसी… पता नहीं क्या बातें कर रहे थे तुम अपने office वाले दोस्तों के साथ, पर यही तो मिस कर रही थी मैं — तुम्हारा यूँ खिलखिलाना, दोस्तों के साथ ऐसे खो जाना जैसे दुनिया में कोई बोझ ही ना हो, जैसे सब ठीक हो, सब…