Continue Reading अधूरी बातें
Posted in Hindi Love Sad

अधूरी बातें

अधूरी बातें , Adhuri baatein.
अधूरी बातें
एक बेहद अजीज मित्र की कलम से पढ़िए एक खूबसूरत गीत,
Presenting a heartfelt piece penned down by one of my dearest friend. Hope you like it as much as I did.

Continue Reading अफ़साना
Posted in Hindi Love Story

अफ़साना

लॉक डाउन की एक अधूरी सी प्रेम कहानी।
जब चाहत कैसी समझ न पाए , दिल कहीं और हैं,पर फिर भी किसी से मिल जाये ? कैसा धोखेबाज़ है दिल , जो करीब है उसी का हो जाये, कभी रूबरू हुए हैं ऐसी बेबुनियाद चाहतों से?

Continue Reading दर्द | Dard
Posted in Hindi Poetry

दर्द | Dard

A poetry of pain, what a heart goes through, but cannot share with anyone.

Continue Reading लगाव | Lagaav
Posted in Hindi Poetry

लगाव | Lagaav

Read a small Poetry from the world of 1sha 2013.
When one heart wants more, but other does not understands!

Continue Reading Khwab khuli ankhon ka | ख़्वाब खुली आँखों का
Posted in Hindi Poetry

Khwab khuli ankhon ka | ख़्वाब खुली आँखों का

Read a Hindi poem on my blog from the world of 1sha 2015.
On the request of international readership, who can’t read Hindi, but understand it, I am presenting two different parts of the poem for them.
Thanks to all the lovely readers out there. Happy Reading!

Continue Reading रिमझिम
Posted in Hindi Love Romantic

रिमझिम

आज सुबह से हल्की हल्की फुहारें पड़ रही थी।बारिश के मौसम में चाय और पकौड़ी का आनंद ही अलग होता है।

Continue Reading कशिश
Posted in Hindi Love Poetry Romantic

कशिश

ये बहती हुई सर्द हवाओं की साज़िश है,
तेरी बाँहों में आने की गुज़ारिश है।

Continue Reading तन्हाई
Posted in Hindi Love Poetry Sad

तन्हाई

न तुम हो, न मैं हूँ। फिर कैसी ये चाहतें है।
तेरे न होने की कैसी ये शिकायतें हैं।

Continue Reading नया मोड़
Posted in Hindi Love

नया मोड़

ज़िन्दगी का ये नया मोड़ बहुत ही सुहाना सा लगने लगा था। तुम्हारे पास आकर , फिर से खुद से जुड़ने लगा था। तुमसे मिलकर अब सब कुछ भूलने भी लगा था। तुम्हारी पनाहों में हमेशा रहने की दुआ करने लगा था। मैं बदलने लगा था।

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Posted in Hindi Love Sad

ज़ख्म

आज भी दिल ख़ुश नहीं है, शायद तुम मिल जाओ तो भी शायद जख्म गहरे और बेहिसाब हैं, इन आँखों की नमी आज भी याद है मुझे पिछली शाम की तरह। दिल में आज भी दर्द हो उठता है तेरी बातें होती हैं जब। क्यों तेरी गलियों में घूमने को दिल आज भी बेचैन है, क्यों तेरे बारे में सब कुछ जानने को बेताब है, क्यों ये तुझसे आज भी प्यार करता है ?