अलविदा
आज बहुत दिनों बाद… मैंने फिर वो बंद पन्ने टटोले, हमारी पुरानी chats के वो अधूरे किस्से खोले। सोचा था वक़्त गुज़र गया, अब दिल नहीं धड़केगा, मैं संभल गई हूँ, अब ये ज़ख्म दोबारा नहीं रिसेगा। पर जैसे ही पहली लाइन पर नज़र गई, मैं फिर वहीं ठहर गई, मैं भागती रही जिससे, आज…