तुझको
क्या थी मैं…जो एक दिन, एक पल भीतुमसे बात किए बिना नहीं रह पाती थी। और क्या हो गई हूँ आज…कि चालीस दिन बीत गए,और मैं अब भी ज़िंदा हूँ। याद है?कैसे मैं खुद को रोकती थी,तुम्हारे मैसेज ignore करती थी,बार-बार…सिर्फ इसलिए क्योंकि मुझे डर था—अगर एक बार तुम्हारी तरफ पूरी तरह मुड़ गई,तो फिर…