माही
मुझे नहीं पता तुम में ऐसा क्या था।
शायद तुम्हारा चेहरा।
शायद तुम्हारी smile।
शायद वो तरीका जिससे तुम मुझे देखते थे।
या शायद वो sukoon… जो मुझे तुम्हारे पास आकर मिलता था।
मैं तो प्यार से almost हार चुकी थी।
इतना टूट चुकी थी कि खुद से promise कर लिया था कि अब किसी को अपने इतना करीब नहीं आने दूँगी कि उसके जाने के बाद मैं खुद को ही संभाल ना पाऊँ।
फिर तुम मिले।
और पता ही नहीं चला कब तुम मेरी आदत बन गए।
ऐसी आदत… जो छोड़ने से भी नहीं छूटती।
मुझे आज भी याद है तुम उस दिन वही कुर्ता पहने हुए थे जो मैंने तुम्हारे लिए लिया था।
तुम सबके बीचों-बीच खड़े थे और मैं बस तुम्हें देखती रह गई थी।
मतलब कोई इतना handsome कैसे लग सकता है?
तुम्हारी लंबी-सी height…
तुम्हारा हल्का-सा झुककर बात करना…
तुम्हारी आँखों में वो अजीब-सी softness…
और तुम्हारी smile……
तुम्हारी जानलेवा smile।
और वो effortless charm जो तुम्हारे अंदर है… जैसे तुम्हें कोशिश ही नहीं करनी पड़ती attractive लगने के लिए।
तुम्हें चलते हुए देखना भी अच्छा लगता था मुझे।
तुम्हारा sleeves fold करना।
बालों में हाथ फेरना।
हल्का-सा मुस्कुराना।
फोन देखते हुए secretly smile करना।
सब कुछ।
तुम इतने अच्छे क्यों लगते हो मुझे?
कुछ लोग खूबसूरत होते हैं।
कुछ लोग अच्छे लगते हैं।
और फिर कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर दिल चुप हो जाता है।
तुम वैसे थे।
और honestly… तुम्हारी सबसे dangerous चीज़ तुम्हारा दिल था।
तुम जिस तरह सुनते थे ना… वो मुझे बहुत तोड़ गया।
तुम notice करते थे।
समझते थे।
मेरा चेहरा देखकर समझ जाते थे कि मैं ठीक नहीं हूँ।
तुम्हारा “क्या हुआ?” पूछना भी मेरे लिए comfort बन गया था।
मैं बहुत अकेली थी।
धीरे-धीरे मैंने चाहना छोड़ दिया था।
खुद को सजाना छोड़ दिया था।
आईने में खुद को देखना तक छोड़ दिया था।
फिर तुम आए…
और मैंने खुद को फिर से महसूस करना शुरू किया।
मैं फिर से तैयार होने लगी।
तुम्हारे लिए।
तुम कहते थे —
“तुम बहुत अच्छी लग रही हो…”
और मैं पूरा दिन उसी एक बात में मुस्कुराती रहती थी।
तुम्हें देखने की ऐसी आदत हो गई थी कि हर सुबह ऑफिस जाते हुए बस यही सोचती थी —
आज दिखोगे क्या?
और जब तुम दिख जाते थे ना…
दिल को अजीब-सा सुकून मिल जाता था।
जैसे किसी ने अंदर का शोर थोड़ी देर के लिए बंद कर दिया हो।
मेरी नज़रें तुमसे हटती ही नहीं थीं।
तुम्हें चोरी-चोरी देखना मुझे बहुत पसंद था।
लिफ्ट में खड़े हुए।
फोन देखते हुए।
किसी और से बात करते हुए भी।
आज भी मेरे पास वो lift वाली photo है जो तुमने Vedika की birthday से पहले भेजी थी।
तुम इतने अच्छे लग रहे थे उसमें कि मैंने वो photo शायद hundred times खोली होगी।
कभी zoom करके देखती थी।
कभी बस screen पर hold करके मुस्कुरा देती थी।
और पता है…
तुम्हें block करने से पहले मैंने तुम्हारे लिए एक shirt भी ली थी।
बस इसलिए क्योंकि मुझे लगता था उसे पहनकर तुम और भी अच्छे लगोगे।
Dangerously handsome.
मैं imagine करती रहती थी तुम्हें उसमें।
हल्की beard।
Sleeves fold किए हुए।
वही smile।
और मैं बस तुम्हें देखती रह जाऊँ जैसे हमेशा रह जाती थी।
फिर वो hug।
मैं आज तक उस hug से बाहर नहीं निकल पाई हूँ।
तुमने मुझे ऐसे पकड़ा था जैसे तुम्हारा पूरा शरीर कुछ कहना चाहता हो।
जैसे तुम मुझे सिर्फ़ hug नहीं कर रहे… feel कर रहे हो।
तुम्हारी साँसें मेरे इतने पास थीं कि मुझे पहली बार समझ आया कि किसी की closeness literally नशा हो सकती है।
उसके बाद सब बदल गया।
हमारी बातें।
हमारा flirt करना।
तुम्हारा मुझे tease करना।
Late night chats।
हमारी naughty बातें।
वो tension जो हम दोनों feel करते थे पर openly बोलते नहीं थे।
सब कुछ इतना naturally हुआ कि मुझे समझ ही नहीं आया कब मैं तुममें इतनी deeply involve हो गई।
जब तुमने पहली बार मेरे साथ सोने की इच्छा जताई थी… पता नहीं क्यों मैं तुम्हें मना नहीं कर पाई।
शायद क्योंकि मैं पहले ही तुम्हारी हो चुकी थी।
Emotionally।
Mentally।
पूरी तरह।
और अब हालत ये है कि मैंने तुम्हें block तो कर दिया है…
लेकिन हर दिन तुम्हें miss करती हूँ।
इतना कि कभी-कभी खुद पर गुस्सा आता है।
रात को songs repeat पर सुनती रहती हूँ।
और हर lyrics में तुम मिल जाते हो।
तुम्हें देखने की ऐसी आदत हो गई थी कि अब बिना तुम्हें देखे दिन अधूरा लगता है।
कभी-कभी सिर्फ़ तुम्हें देख लेने से सुकून मिल जाता था।
बस एक झलक।
और मेरा पूरा दिन अच्छा हो जाता था।
मुझे पता है तुम मेरे नहीं हो।
शायद कभी हो भी नहीं सकते।
मैंने उस लड़की को भी देख लिया है जिससे तुम शादी करने वाले हो।
वो बहुत सुंदर है।
तुम्हारी दुनिया जैसी लगती है।
फिर भी पता नहीं क्यों…
मेरा दिल आज भी तुम्हें अपना ही मानता है।
मैं तुमसे इसलिए दूर नहीं हुई क्योंकि मैं तुमसे नफ़रत करती हूँ।
मैं तुमसे इसलिए दूर नहीं हुई क्योंकि मैं तुमसे बहुत ज़्यादा प्यार करने लगी थी।
इतना ज़्यादा…
कि खुद को खोने लगी थी।
इतना ज़्यादा…
कि तुम्हारा ना होना भी तुम्हारी तरह लगने लगा था।
अब कभी-कभी रात को अचानक नींद खुलती है…
और कुछ seconds के लिए लगता है तुम हो।
फिर याद आता है —
तुम तो कभी मेरे थे ही नहीं।
बस मेरी आदत थे।
मेरा सुकून।
मेरी सबसे खूबसूरत गलती।
और शायद कुछ लोग ज़िंदगी में सिर्फ़ इसलिए आते हैं…
ताकि हमें पता चल सके कि दिल अब भी धड़क सकता है…
भले ही आख़िर में उसी दिल को टूटना क्यों ना पड़े।
और फिर भी…
हर रात सोने से पहले दिल बस यही दुआ करता है —
काश तुम एक बार सामने आ जाओ…
और मैं बिना कुछ कहे बस तुम्हें देखती रहूँ।
अब मैं तुम्हें disturb नहीं करूँगी।
ना message।
ना calls।
ना कोई शिकायत।
बस शायद…
किसी दिन कहीं अचानक तुम दिख जाओ…
और मैं दूर से तुम्हें देखकर चुपचाप मुस्कुरा दूँ।
ठीक वैसे ही…
जैसे कोई अपनी सबसे पसंदीदा चीज़ खो देने के बाद भी उससे प्यार करना बंद नहीं कर पाता।
कभी कह तो नहीं पायी
न कहना चाहती हूँ
प्यार था,
प्यार है,
प्यार रहेगा,
बस मैं नहीं रहूंगी
तुम्हारी लाइफ में
बहुत ज़िद्दी हो ना तुम,
मैं भी हूँ ज़िद्दी,
चाहिए तो पूरा चाहिए
आधा सा अधूरा सा कुछ भी नहीं चाहिए
फिर वो चाहे तुम ही क्यों ना हो |

