Part 6

ज़िंदगी को शायद मेरी बात बुरी लग गयी थी, क्योंकि उसके कुछ ही महीने बाद… सब कुछ बदलना शुरू हो गया। सबसे पहले Kusha एक दिन उसने message किया— “आज मत मिलना।”

मैंने सिर्फ “Okay” reply कर दिया।

अगले दिन भी कोई message नहीं। फिर तीसरे दिन, फिर पूरा हफ्ता। मैंने call नहीं किया, उसने भी नहीं। हम दोनों के बीच वैसे ही था—ना explanation, ना सवाल। जो था… जैसा था… ठीक था। या शायद हम दोनों खुद को यही समझा रहे थे।

लगभग दस दिन बाद शाम को मेरे flat की bell बजी। दरवाज़ा खोला, सामने Kusha खड़ी थी। Office वाले formal कपड़े, हाथ में purse और आँखों के नीचे हल्की सी थकान।

मैंने पूछा, “कुछ हुआ?”

उसने सिर्फ सिर हिला दिया, “नहीं।”

फिर बिना कुछ कहे उसने मुझे गले लगा लिया, बहुत ज़ोर से। उस hug में desire कम था… थकान ज़्यादा। मैं कुछ नहीं बोला, बस उसके बालों में हाथ फेर दिया। हम काफी देर तक वैसे ही खड़े रहे।

उस रात हमने ना beer खोली, ना music चला, ना कोई movie। बस एक-दूसरे के पास बैठे रहे। कभी-कभी… किसी इंसान को touch की ज़रूरत नहीं होती, सिर्फ किसी के पास होने की होती है। और उस रात शायद Kusha को वही चाहिए था। रात धीरे-धीरे गुज़र गयी। हम एक-दूसरे के करीब आए… जैसे हमेशा आते थे। उसके हाथ मेरे कंधों पर थे और मेरा चेहरा उसके बालों में। उसने आँखें बंद करके बस इतना कहा, “Don’t ask me anything.”

“मैंने पूछा भी कब है?”

वह हल्की सी मुस्कुरायी। और उसके बाद… हम दोनों ने बाकी बात शब्दों के बिना की। हमारी intimacy कभी जुनून वाली नहीं थी, उसमें एक अजीब सी familiarity थी—जैसे दो लोग… जो एक-दूसरे के तन को तो जानते हों… लेकिन दिल के आस-पास कभी गए ही न हों। उस रात भी सब कुछ पहले जैसा था। फिर भी… पहली बार मुझे लगा कि हम दोनों एक-दूसरे को use कर नहीं रहे थे। हम दोनों एक-दूसरे के अंदर की खाली जगह थोड़ी देर के लिए भर रहे थे। और दोनों को पता था… सुबह होते ही वह जगह फिर खाली हो जाएगी।

सुबह चाय पीते वक्त उसने अचानक कहा, “मेरी शादी Fix हो गयी।”

मैं कुछ second तक उसे देखता रहा, “Congratulations.”

उसने चाय का mug table पर रखा, “बस?”

“और क्या बोलूं?”

“पता नहीं।”

“तुम खुश हो?”

उसने जवाब देने में काफी वक़्त लिया, “होना चाहिए?”

ये पहली बार था जब उसने झूठ बोला, और पहली बार था… जब मैंने उसका झूठ पकड़ लिया। लेकिन मैंने उसे expose नहीं किया। हर सच बोल देना ज़रूरी नहीं होता।

उसके बाद वह धीरे-धीरे दूर होने लगी। Messages कम, calls बंद, मिलना लगभग खत्म। Office में भी वह पहले से ज़्यादा busy रहने लगी। कभी-कभी corridor में मिलती— “Hi.”

“Hi.”

बस। मुझे बुरा लगा? सच कहूँ… उतना नहीं। शायद इसलिए क्योंकि हमने कभी एक-दूसरे से हमेशा साथ रहने का वादा ही नहीं किया था। हम दोनों जानते थे… ये कहानी एक दिन खत्म होनी ही थी, बस किसी ने date decide नहीं की थी।

एक शाम smokers’ zone में वह अकेली खड़ी थी, हाथ में cigarette। मैंने उसके पास जाकर पूछा, “शादी कब है?”

“अगले महीने।”

“हम्म।”

“क्या?”

“कुछ नहीं।”

“तुम बहुत अजीब इंसान हो।”

“ये तो मुझे भी पता है।”

वह हंसी, काफी दिनों बाद, “एक बात बोलूं?”

“हाँ।”

“Mayank याद है?”

“हाँ।”

“वह अब भी Ananya के पीछे है।”

मैं मुस्कुरा दिया, “क्या हुआ?”

“कुछ नहीं।”

“बस सोच रहा था…”

“लोग बदलते कितनी देर से हैं।”

“कुछ logic ही नहीं होता।”

“कुछ लोग कभी बदलते ही नहीं।”

उसने cigarette का आखिरी drag लिया, “मुझे लगता है तुम भी नहीं बदलोगे।”

उस वक़्त मैंने उसकी बात हंसी में उड़ा दी। आज लगता है… वह गलत भी नहीं थी। मैं वाक़ई नहीं बदला था… अभी तक। क्योंकि मेरी ज़िंदगी में अभी वह रात आनी बाकी थी… जब मुझे पहली बार समझ आया… कि attraction और मोहब्बत एक ही चीज़ नहीं होते।

और उस रात का नाम था… Kusha की शादी।

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