Part 2
First Day
Corporate offices का एक अजीब talent होता है।
शहर बदल जाता है। Building बदल जाती है। Company का नाम बदल जाता है।
लेकिन induction room… हमेशा एक जैसा होता है।
सफ़ेद दीवारें। Glass के cabins। एक projector जो शुरू होने से पहले ही hang हो जाता है। Plastic की पानी की bottles।
और एक HR… जो हर नए batch को ये यक़ीन दिलाती है कि उन्होंने अपनी life का best decision लिया है।
उस दिन भी कुछ अलग नहीं था। हम सब नए थे। नए शहर। नयी नौकरी। नए सपने।
और हर किसी ने confidence नाम की एक artificial smile पहन रखी थी।
मैं last row में बैठा था। आदत थी मेरी। ना इसलिए क्योंकि मैं शर्मीला था। बल्कि इसलिए क्योंकि मुझे लोगों को देखना पसंद था।
Last row से सब दिख जाता है। कौन overconfident है। कौन डरा हुआ है। कौन impress करने आया है। और कौन सिर्फ़ salary के लिए।
मैं लोगों को observe करता था। और लोग… मुझे।
College खत्म होते-होते मेरी reputation मुझसे पहले पहुँच जाती थी। Freshers batch में भी दो-तीन लोग मुझे पहचान गए थे।
“तू Sugandh है ना?”
मैंने सिर्फ़ हाँ में सिर हिला दिया।
“Bro… सुना था बड़ा player है।”
मैं बस मुस्कुरा दिया। कुछ reputations explain करने से बेहतर होती हैं। Log खुद ही कहानियाँ बना लेते हैं। और मुझे कभी उनकी कहानियों से problem नहीं हुई।
“Good morning everyone!”
HR की energetic आवाज़ ने room को ज़िंदा कर दिया।
“Welcome to your first day.”
Room में हल्की सी ताली बजी। किसी को सच में excitement थी। बाकी सब बस manners निभा रहे थे।
“Let’s start with introductions.”
बस। ये वो moment होता है जहाँ हर इंसान खुद का एक edited version introduce करता है।
“किसी को travelling पसंद होती है।” “किसी को music।” “किसी को reading।”
और सबसे common… “I’m a quick learner.”
मैं अंदर ही अंदर हंस दिया। एक-एक करके सब खड़े होने लगे।
Naam। College। City। Hobbies। Future goals।
सब कुछ इतना rehearsed लग रहा था कि लग रहा था placement interview अभी खत्म ही नहीं हुआ।
मेरी बारी आई। मैं खड़ा हुआ।
“Hi
I am Sugandh”
बस। HR ने मुस्कुरा कर पूछा, “बस?”
“बाकी लोग धीरे-धीरे जान ही जाएँगे।”
पूरे room में हल्की सी हंसी गूंजी। मैं वापस बैठ गया।
मुझे introductions कभी पसंद नहीं आए। इंसान खुद को पांच line में define नहीं कर सकता। और जो कर लेता है… मैं उसपर कभी भरोसा नहीं करता।
दो-तीन लोग और खड़े हुए। मैं आधा सुन रहा था। आधा अपना joining folder उलट-पलट रहा था।
फिर… एक आवाज़ आई।
“Hi…”
पता नहीं क्यों मैंने folder बंद कर दिया।
“Hi, I’m Ananya.”
Naam पहली बार सुना था। लेकिन उस आवाज़ में कुछ ऐसा था… जिसने बिना वजह मेरा ध्यान खींच लिया।
मैंने पहली बार उसे ध्यान से देखा। Black kurta। खुले बाल। चेहरे पर बिना किसी effort की smile। आँखों में वो confidence… जो या तो बहुत खुश लोगों में होता है… या बहुत टूट चुके लोगों में।
उस वक़्त मुझे लगा… शायद पहली category।
आज सोचता हूँ… शायद मैं गलत था।
“Tell us something about yourself.” HR ने पूछा।
Ananya ने एक second भी नहीं सोचा।
“मुझे लिखना बहुत पसंद है।”
Room में दो-तीन लोगों ने सिर उठा कर देखा। Corporate induction में लोग generally बोलते हैं— Movies। Netflix। Travel। Photography।
Writing… थोड़ा unexpected था।
HR भी थोड़ी excited हो गई।
“Really? What do you write?”
“Mostly poetry.”
“Can we hear one?”
Room में दो-तीन लोग हंस दिए।
जैसे किसी ने school assembly announce कर दी हो।
Ananya भी हंसी।
फिर बिना किसी झिझक के बोली,
“Sure.”
उसने ना phone निकाला। ना diary। ना कोई paper।
बस आँखें एक पल के लिए बंद कीं। जैसे शब्दों को याद नहीं… महसूस कर रही हो।
फिर उसने बोलना शुरू किया।
"छुआ जब तुमने मुझे ऐसे..."
"...जैसे किसी के हाथ में हो गुलाब..."
पूरा room चुप हो गया। मैं भी।
"और छोड़ा तुमने ऐसे..."
"कि उमड़ आया आँखों में सैलाब..."
उसकी आवाज़ बहुत ऊँची नहीं थी।
लेकिन उसमें एक अजीब सी सच्चाई थी।
जैसे वो poem सुना नहीं रही… जी रही हो।
मैं पहली बार उसकी तरफ़ देख रहा था।
ध्यान से।
सिर्फ़ उसकी तरफ़।
बाकी room धीरे-धीरे background बन गया था।

