Novel

  • Part 5

    उस दिन के बाद Mayank का नाम हमारे बीच कभी-कभी आने लगा। मैं उसके बारे में ज़्यादा नहीं पूछता था और कुशा भी ज़्यादा बताती नहीं थी। लेकिन कुछ कहानियाँ होती हैं… जो बिना पूछे भी धीरे-धीरे खुल जाती हैं। एक शाम हम दोनों office के बाहर वाली टपरी पर बैठे थे। उसके हाथ में…

  • Part 4

    शायद इसीलिए… जब Office में पहली बार कुशा से बात हुई… तो मुझे लगा ही नहीं था कि वो मेरी ज़िंदगी का इतना लंबा chapter बन जाएगी। कुशा हमसे लगभग दो साल senior थी। पहली नज़र में ही समझ आ जाता था कि वो उन लोगों में से नहीं है जो हर किसी से दोस्ती…

  • Part 3

    Poem खत्म हुई। Room में दो second की खामोशी छायी रही। फिर तालियां बजने लगीं। किसी ने “Nice!” कहा। किसी ने “Beautiful!” बोला। HR ने मुस्कुरा कर कहा, “That was lovely.” Ananya बस “Thank you” कहकर बैठ गई। जैसे उसने कोई ख़ास बात की ही ना हो। मैं उसे देख रहा था। Poem याद नहीं…

  • Part 2

    First Day Corporate offices का एक अजीब talent होता है। शहर बदल जाता है। Building बदल जाती है। Company का नाम बदल जाता है। लेकिन induction room… हमेशा एक जैसा होता है। सफ़ेद दीवारें। Glass के cabins। एक projector जो शुरू होने से पहले ही hang हो जाता है। Plastic की पानी की bottles। और…

  • Part 1

    The Reunion Club से बाहर निकलते वक़्त मैंने बस आदत से मजबूर होकर एक बार पीछे मुड़कर देखा था। कभी-कभी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी कहानियाँ किसी planning से नहीं, एक छोटी सी आदत से शुरू होती हैं। और मेरी… उसी रात शुरू हुई। Friday night था। Club अपने पूरे शोर पर था। Bass इतनी तेज़…