Part 5
उस दिन के बाद Mayank का नाम हमारे बीच कभी-कभी आने लगा। मैं उसके बारे में ज़्यादा नहीं पूछता था और कुशा भी ज़्यादा बताती नहीं थी। लेकिन कुछ कहानियाँ होती हैं… जो बिना पूछे भी धीरे-धीरे खुल जाती हैं। एक शाम हम दोनों office के बाहर वाली टपरी पर बैठे थे। उसके हाथ में cigarette थी और मेरे हाथ में चाय।
उसने अचानक पूछा, “तुम्हारी Fresher Batch वाली Ananya…”
मैंने कहा, “Hmm?”
उसने आगे कहा, “उसने पता नहीं क्या जादू कर दिया है Mayank पर।”
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा, “क्यों?”
उसने कहा, “पता नहीं।”
उसने cigarette का लंबा drag लिया।
“दो महीने हो गए। मैंने block कर दिया। वह फिर भी उसके पीछे ही घूमता रहता है।”
मैं कुछ second चुप रहा। फिर धीरे से बोला, “Kusha…”
उसने कहा, “Hmm?”
मैंने पूछा, “तुमने उसे block किया… या खुद को?”
वह थोड़ा सा चौंक गयी, “क्या मतलब?”
मैंने चाय का cup हाथ में घुमाया,
“मेरा मतलब… अगर तुम सच में move on कर चुकी होती… तो तुम्हें ये सब देखकर फ़र्क़ नहीं पड़ता। तुम उसे भूलना नहीं चाहतीं… तुम बस उसे punish करना चाहती हो।”
उसने आँखें सिकोड़ कर मुझे देखा, “मैं क्यों punish करूंगी?”
मैंने कहा, “क्योंकि तुम hurt हुई थीं। Simple।”
वह कुछ बोलने ही वाली थी… फिर रुक गयी।
मैंने धीरे से कहा, “कभी-कभी हम लोगों को माफ़ नहीं करते… क्योंकि हमें लगता है सामने वाला deserve नहीं करता। पर सच ये होता है… कि हम खुद deserve करते हैं—Peace।”
कुशा काफी देर तक चुप रही। Cigarette उसके हाथ में जलती रही।
उसने पूछा, “तुम कहना क्या चाहते हो?”
मैंने सीधा उसकी आँखों में देखा,
“ये… कि अगर तुम उसे माफ़ कर दोगी… तो तुम उसके लिए नहीं… खुद के लिए free हो जाओगी।”
वह धीरे से हंस पड़ी, “वाह… आज बड़े philosopher बन रहे हो।”
मैं भी हल्का सा मुस्कुरा दिया, “Experience है।”
उसने पूछा, “अपना?”
मैंने कहा, “हाँ।”
उसने पूछा, “कौन?”
मैं एक second के लिए रुक गया, “मैं खुद।”
वह मुझे देखते हुए थोड़ी serious हो गयी,
“तुमने किसी को माफ़ किया है?” मैंने जवाब दिया, “हाँ।”
उसने पूछा, “किसको?”
मैंने कहा, “खुद को।” वह चुप हो गयी।
उसकी आँखों में पहली बार हल्का सा softness आया।
उसने पूछा, “Easy नहीं होता ना?”
मैंने कहा, “नहीं, पर ज़रूरी होता है।”
उस रात जब वह मेरे flat पर आई… सब कुछ हमेशा की तरह ही हुआ। Beer, music और खामोशी। उसने अपने heels दरवाज़े के पास उतारे। मैं kitchen में दो glasses निकालने चला गया। वापस आया… तो वह balcony में खड़ी शहर देख रही थी।
“पता है…” उसने बिना मेरी तरफ देखे कहा,
“सबको लगता है heartbreak बहुत dramatic होता है।”
मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया, “फिर?”
उसने कहा, ” बस… एक दिन तुम kisi ka wait करना बंद कर देते हो।”
मैं धीरे से बोला, “या फिर… तुम decide कर लेते हो कि अब wait करना बंद करना है।”
वह मेरी तरफ मुड़कर देखी, “Difference है?”
मैंने कहा, “बहुत।”
उसने पूछा, “कैसे?”
मैंने जवाब दिया, “पहला वाला वक़्त करता है, दूसरा तुम।”
वह कुछ second तक मुझे देखती रही।
फिर धीरे से पूछा, “और अगर मैं ready ना हूँ?”
मैंने सीधा जवाब दिया, “तो मत हो। पर एक दिन तुम्हें खुद से पूछना पड़ेगा… कि तुम उसे याद कर रही हो… या बस उस दर्द को पकड़ के बैठी हो।”
वह चुप हो गयी। इस बार उसकी आँखों में हल्का सा पानी था। उस रात भी वह मेरी बाहों में सोयी। सुबह भी चाय उसने ही बनायी। Office भी हम अलग-अलग गए। सब कुछ normal था। लेकिन उस normal के अंदर… कुछ बदल गया था। जैसे किसी ने अंदर ही अंदर एक दरवाज़ा खोल दिया हो।मुझे Kusha आज खुश लग रही थी। उसने Mayank को माफ़ करके आगे बढ़ने का फैसला ले लिया था। अब वो किसी के इंतज़ार में नहीं थी—ना किसी सवाल के, ना किसी जवाब के, और ना ही Mayank के।
Office में दूसरी तरफ… Ananya बिल्कुल अलग दुनिया थी। उसके आस-पास हमेशा लोग रहते थे। कोई presentation में help मांग रहा होता, कोई coffee, कोई advice, तो कोई सिर्फ उसके साथ बैठना चाहता था। मुझे कभी समझ नहीं आया… वह सबको इतना वक़्त कैसे दे देती थी। एक दिन pantry में मैंने उसे पहली बार किसी को डांटते हुए देखा। एक trainee housekeeping वाले अंकल से बदतमीज़ी से बात कर रहा था। Ananya सीधा उसके पास गयी,
“एक मिनट।” लड़का रुक गया।
“उनसे इस tone में बात मत कीजिए।”
लड़के ने पूछा, “Why?”
Ananya ने जवाब दिया, “Because respect designation देखकर नहीं दी जाती।”
Pantry एकदम चुप हो गयी। लड़का कुछ बोले बिना वहाँ से चला गया। Housekeeping वाले अंकल बस मुस्कुरा दिए। Ananya ने भी बात वहीं ख़त्म कर दी, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मैं दूर से ये सब देख रहा था। उस दिन पहली बार… मैंने उसकी खूबसूरती से ज़्यादा… उसका character notice किया। और अजीब बात ये थी… मुझे उस दिन वह पहले से भी ज़्यादा खूबसूरत लगी। उस वक़्त भी मैंने उस feeling को कोई नाम नहीं दिया। मैं हर चीज़ को नाम देने से बचता था। शायद इसलिए… क्योंकि नाम देने के बाद ज़िम्मेदारी शुरू हो जाती है। और ज़िम्मेदारी… मुझे कभी पसंद नहीं थी।
TO BE CONTINUED

