Part 7
Kusha की शादी का invitation मुझे WhatsApp पर नहीं मिला। उसका phone आया।
उसने सीधा कहा, “मेरी शादी है।”
मैंने पूछा, “कब?”
उसने जवाब दिया, “अगला Sunday।”
और फिर कहा, “आना।”
ना उसने force किया, ना emotional हुई,
बस… “आना।”
मैंने बिना सोचे कहा, “ज़रूर।”
और Call cut हो गया। मैं काफी देर तक phone हाथ में लिए बैठा रहा। अजीब बात थी, जिस लड़की के साथ मैंने इतनी रातें गुज़ारी थीं, उसकी शादी की खबर सुनकर मुझे दर्द नहीं हुआ। बस… एक chapter बंद होने की आवाज़ सी आयी। और शायद वही हमारा रिश्ता था—प्यार नहीं, एक लंबा chapter।
शादी वाले दिन मैं थोड़ा late पहुँचा। Venue शहर के बाहर था। December की शाम, ठंडी हवा और lights से सजा हुआ lawn। भीड़ को चीरते हुए मेरी नज़र सीधे stage पर गयी, जहाँ Kusha खड़ी थी। वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। भारी लहंगे और गहनों के बीच उसका वह सादगी भरा चेहरा और बड़ी-बड़ी आँखें, जिनमें हमेशा एक अजीब सा खालीपन रहता था, आज कुछ अलग कह रही थीं। Stage की Lights में उसका चेहरा चमक रहा था। उसे इस तरह दुल्हन बने देखना एक सुखद अहसास था, वह हमेशा से ही बेहद Graceful थी, लेकिन आज उसमें एक मुकम्मल ठहराव दिख रहा था। वह मुस्कुरा रही थी, पर उस मुस्कुराहट के पीछे वही पुरानी Kusha थी, जिसे मैं बहुत करीब से जानता था।
Stage पर लोग लाइन लगा कर photo खिंचवा रहे थे। मैं अंदर घुसा ही था कि किसी ने पीछे से मेरी आँखें बंद कर दीं और
कहा, “Guess।”
मैं हंस पड़ा, “Ananya।”
उसने तुरंत हाथ हटा लिए और बोली, “Cheater!”
मैं मुड़कर उसे देखता रह गया—दस-पंद्रह second, शायद उससे ज़्यादा। Office के बाद पहली बार उसे इतनी फुर्सत से देख रहा था। Black net की साड़ी, खुले बाल, छोटे झुमके और आँखों में वही शरारत जो office के पहले दिन थी। लेकिन आज उसमें कुछ और भी था—एक सुकून।
मेरे मुँह से बस इतना ही निकला, “तुम…”
उसने पूछा, “क्या?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
वह बोली, “हाँ… ये ‘कुछ नहीं’ वाली look मैं पहचान गयी हूँ।”
मैं हंस दिया और कहा, “तुम बदल गयी हो।”
उसने पूछा, “अच्छा?”
मैंने जवाब दिया, “Better।”
उसने सिर हल्का सा झुकाया, “Thank you।”
फिर बिना किसी warning के मुझे गले लगा लिया। Office में वह सबसे hug करती थी, लेकिन पता नहीं क्यों, उस hug में मुझे कुछ अलग लगा। या शायद, मैं ही अलग था।
उसने पूछा, “वैसे… तुम यहाँ कैसे?”
मैंने कहा, “Kusha ने बुलाया।”
उसने फिर पूछा, “तुम दोनों friends थे?”
मैं एक second के लिए रुक गया और झूठ बोला, “हाँ… office वाले friends।”
उसने मेरी आँखों में देखकर बस “Hmm…” कहा, जैसे उसने कुछ notice किया हो, या शायद कुछ भी नहीं।
फिर मैंने पूछा, “तुम?” उसने मुस्कुरा कर stage की तरफ इशारा किया, “Plus one।”
Mayank वहीं खड़ा था। दूर से ही हाथ हिला कर बोला, “ओये Sugandh!”
मैं उसके पास गया, उसने गले लगाया और हंसी के साथ कहा, “यार… इंसान किसी से कितना भी प्यार कर ले… शादी तो आखिर किसी और से ही होती है।” हम तीनों हंस पड़े।
लेकिन पता नहीं क्यों, मैंने उस वक्त सिर्फ Ananya को देखा। वह भी हंस रही थी, लेकिन उसकी हंसी Mayank के joke पर थी या मेरी तरफ देखकर… मैं आज तक decide नहीं कर पाया। Memory भी अजीब चीज़ होती है—जो याद रह जाता है, ज़रूरी नहीं वह सच भी हो।
Ananya ने अचानक पूछा, “वैसे… सच-सच बताना।”
मैंने कहा, “Hmmm?”
उसने पूछा, “College में कितनी लड़कियों के साथ flirt किया था तुमने?”
मैं ज़ोर से हंस पड़ा, “सीधा लड़कियों पर आ गयीं?”
उसने कहा, “Office में तुम्हारी काफी stories सुनी थीं।”
मैंने जवाब दिया, “Stories थीं, सच नहीं।”
उसने पूछा, “सच नहीं?”
मैंने कहा, “मुझे नहीं पता।”
उसने आँखें सिकोड़ कर मुझे देखा और बोली, “Convenient answer।”
फिर मुस्कुरा दी और पूछा, “मेरे साथ try क्यों नहीं किया?”
उसका सवाल सुनकर मैं एक moment के लिए चुप हो गया।
मैंने पूछा, “सच सुनोगी?”
उसने कहा, “हाँ।”
मैंने कहा, “मुझे लगा तुम मना कर दोगी।”
उसने हैरान होकर पूछा, “बस?”
मैंने कहा, “हाँ।”
उसने कहा, “तुमने पूछा ही नहीं।”
मैंने फिर पूछा, “पूछता तो मान जातीं?”
Ananya कुछ second तक मुझे देखती रही, फिर बहुत धीरे से बोली, “Pata nahi।”
उसके उस “Pata nahi” में हजार जवाब थे, या शायद एक भी नहीं। और वही पहली बार था जब मुझे लगा कि शायद मैंने इस लड़की को कभी समझा ही नहीं।
उस रात शादी में बहुत लोग थे, music था, dance था, हंसी थी, लेकिन मेरी याद में सिर्फ एक scene बचा—मैं और Ananya, buffet के पास खड़े, हाथ में coffee और हम दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी। Na uncomfortable, na romantic, बस… ऐसी खामोशी जिसमें दोनों को लग रहा था कि अगर बात शुरू हुई तो शायद बहुत देर तक खत्म नहीं होगी। मुझे उस वक्त बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उस शाम के बाद मैं एक और continent चला जाऊँगा और मुझे लगेगा कि मैंने Ananya को पीछे छोड़ दिया है।
इंसान कितनी आसानी से खुद को झूठ बोल लेता है।

