Part 9
Rukhsaar ने मुझे घर drop किया। मैं गाड़ी से उतरने ही वाला था कि उसने इंजन बंद कर दिया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया।
“क्या हुआ?”
मैंने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
“आज कुछ ज़्यादा ही मुस्कुरा रहा है।”
मैं हँस दिया।
“ऐसा?”
“हाँ। बता… कौन मिल गया?”
मैंने सिर सीट से टिकाकर एक लंबी साँस ली।
“कोई नहीं… पुराने office की एक colleague मिली थी।”
“बस?”
“हाँ।”
“नाम?”
“Ananya”
Rukhsaar कुछ सेकंड तक मुझे देखता रहा। फिर उसके चेहरे पर वही मुस्कान आ गई जो हर दोस्त के चेहरे पर आ जाती है, जब उसे लगता है कि सामने वाला कुछ छुपा रहा है।
“अच्छी थी?”
मैं हँस पड़ा।
“ये कैसा सवाल है?”
“सीधा सवाल है। अच्छी थी?”
मैंने खिड़की के बाहर देखते हुए कहा,
“मुझे याद ही नहीं था कि वो अब कैसी दिखती होगी।”
“अच्छा…”
वो मुस्कुराया।
“फिर तो मामला थोड़ा serious है।”
“कुछ serious नहीं है।”
“शादी हो गई उसकी?”
मैंने कंधे उचका दिए।
“पता नहीं।”
“यार…”
“दस साल हो गए। हो ही गई होगी।”
मैंने कुछ नहीं कहा।
शायद हो गई होगी।
शायद नहीं।
मैंने कभी जानने की कोशिश भी नहीं की थी।
रुख़सार फिर हँस पड़ा।
“पहले कभी नाम नहीं सुना तेरे मुँह से”
मैंने दरवाज़ा खोलते हुए कहा, “तुझे लड़की नहीं मिल रही…”
“…तो अब सबसे मिलते ही marital status check करेगा?”
“बकवास बंद कर।”
“ठीक है। कल cricket?”
“हाँ।”
“नौ बजे।”
“Done.”
मैं गाड़ी से उतर गया।
उसने हाथ हिलाया और गाड़ी आगे बढ़ गई।
Flat में घुसते ही हमेशा वाली ख़ामोशी मेरा इंतज़ार कर रही थी।
मैंने shoes एक तरफ फेंके, watch table पर रखी और बिना कपड़े बदले सीधे बिस्तर पर लेट गया।
कमरे में सिर्फ़ AC की आवाज़ थी।
मैं कुछ मिनट तक छत देखता रहा।
फिर जाने क्यों…
मैंने phone उठा लिया।
WhatsApp खोला।
Ananya
Blank chat.
मैंने type किया—
Hi… This is Sugandh.
कुछ सेकंड तक message को देखता रहा।
फिर delete कर दिया।
दोबारा type किया—
Sugandh this side.
मैं खुद ही हँस पड़ा।
“ये क्या लिख रहा हूँ मैं…”
Delete.
ज़िंदगी में पहली बार किसी लड़की को message भेजने में इतनी परेशानी हो रही थी।
अजीब बात थी।
आज तक मुझे कभी conversation शुरू करनी ही नहीं पड़ी।
लोग खुद आकर बात कर लेते थे।
बाकी सब अपने-आप हो जाता था।
लेकिन यहाँ…
एक साधारण-सा message भी नहीं लिखा जा रहा था।
मैंने phone फिर हाथ में लिया।
इस बार ज़्यादा नहीं सोचा।
बस लिखा—
Reached home?
मैंने Send दबा दिया।
Message चला गया।
अब मेरी नज़र screen पर अटक गई।
एक मिनट।
दो मिनट।
तीन मिनट।
मैंने phone side में रख दिया।
दस सेकंड बाद फिर उठा लिया।
Online.
Offline.
Last seen.
फिर Offline.
मैं खुद पर हँस पड़ा।
“पागल…”
इतनी बेचैनी मुझे आख़िरी बार कब हुई थी…
याद नहीं।
Phone फिर तकिये पर रख दिया।
इस बार vibration हुई।
मैंने लगभग तुरंत phone उठा लिया।
Reached 😊
बस।
एक smiley.
मैं कुछ सेकंड तक उस message को देखता रहा।
फिर जाने क्यों…
मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई।
पहचान गई।
उस रात हमारी और कोई बात नहीं हुई।
शायद ज़रूरत भी नहीं थी।
अगले दिन Sunday था।
Alarm के बिना आँख खुली।
Coffee बनाई।
Washing machine चला दी।
कमरा थोड़ा-बहुत साफ़ किया।
सब कुछ रोज़ जैसा ही था।
लेकिन…
मैं रोज़ जैसा नहीं था।
Coffee का mug लेकर balcony में खड़ा था कि अचानक ख़याल आया—
कल मैं Ananya से मिला था।
दस साल।
दस साल में उसकी ज़िंदगी में क्या-क्या हुआ होगा?
क्या उसने शादी कर ली होगी?
क्या उसे कभी किसी से प्यार हुआ होगा?
क्या कभी उसका दिल टूटा होगा?
ये सारी बातें अचानक मेरे दिमाग़ में क्यों आने लगी थीं…
मैं खुद नहीं समझ पा रहा था।
लोग मुझे हमेशा शांत, mature और detached समझते थे।
मैं था भी।
कम-से-कम ऊपर से।
मैं ज़्यादा सवाल नहीं पूछता था।
ज़रूरत भी नहीं पड़ती थी।
लोग खुद ही अपने बारे में बता देते थे।
बाकी जो नहीं बताते…
वो मैं observe कर लेता था।
लेकिन…
Ananya
उसे समझने में मुझे हमेशा थोड़ा ज़्यादा वक्त लगा था।
मैंने phone उठाया।
WhatsApp खोला।
अब उसकी DP दिख रही थी।
मैंने photo खोली।
बस एक normal-सी photo थी।
लेकिन…
उसे देखते ही मेरे दिमाग़ में एक पुराना दिन लौट आया।
Amsterdam से वापस आने के कुछ दिन बाद का।
Office.
Farewell party.
बहुत सारी beer.
Jet lag.
और…
Ananya
शायद…
उसी रात मैंने उसे पहली बार सच में देखा था।

