Part 10

मैं अभी भी उसकी WhatsApp DP देख रहा था।एक बिल्कुल Normal-सी photo.ना कोई pose.ना कोई filter.फिर भी…उसे देखते ही मैं सीधे उस शाम में पहुँच गया।

Amsterdam से वापस आए मुझे मुश्किल से चार-पाँच दिन हुए थे। Jet lag अभी पूरी तरह गया नहीं था। दिन में नींद आती थी और रात को आँख खुल जाती थी। शरीर India में था, लेकिन body clock अभी भी Europe में अटकी हुई थी।

उसी बीच office पहुँचा तो पता चला किसी का farewell था।मैंने मन ही मन सोचा, आधा घंटा रुकूँगा और निकल जाऊँगा।लेकिन office वाले…Office वाले किसी को इतनी आसानी से निकलने कहाँ देते हैं।

“ओए Europe वाले!”

पीछे से किसी ने आवाज़ लगाई।

मैंने मुड़कर देखा।

Samyak था।

“आज तो party देकर ही जाएगा।”

मैं हँस पड़ा।

“यार, अभी उतरा हूँ flight से।”

“तो?”

“Jet lag है।”

“Beer पी ले… ठीक हो जाएगा।”

“Scientific logic?”

“नहीं… corporate logic.”

मैं हँस दिया।

“चल।”

Restaurant office से ज़्यादा दूर नहीं था।ऊपर terrace seating थी। हल्की-हल्की हवा चल रही थी। एक तरफ fairy lights लगी थीं और दूसरी तरफ पूरा शहर दिखाई दे रहा था।Table पर beer की bottles, fries, peanuts और आधा खाया हुआ pizza पहले से पड़ा था।लगभग पूरा batch वहीं था।कुछ लोग farewell वाले के साथ photo खिंचवा रहे थे।कुछ लोग HR की बुराई कर रहे थे।कुछ promotion discuss कर रहे थे।Corporate farewell हर बार एक जैसा ही होता है।

बस…लोग बदल जाते हैं।मैं सबसे हाथ मिलाकर corner वाली chair पर जाकर बैठ गया।

पहला beer आया।

फिर दूसरा।

Jet lag और beer…दोनों मिलकर दिमाग़ को थोड़ा slow कर देते हैं।मैं बातें सुन तो रहा था…लेकिन ध्यान कहीं और था।तभी मेरी नज़र उस पर पड़ी।

Ananya

वो सामने वाली side पर बैठी थी।हाथ में beer की bottle.बाल खुले हुए।और हमेशा की तरह…पूरी table में सबसे ज़्यादा वही बोल रही थी।कभी किसी को छेड़ रही थी।कभी खुद हँस रही थी।कभी किसी की खिंचाई कर रही थी।पूरी table उसकी बातों पर हँस रही थी।मैं दूर से उसे देख रहा था।सुन नहीं रहा था।उसकी आवाज़ बाकी आवाज़ों में घुल गई थी।लेकिन उसकी हँसी…अलग पहचान में आ रही थी।

दूसरा beer ख़त्म हुआ।

तीसरा आ गया।

किसी ने toast दिया।किसी ने farewell speech.किसी ने emotional होने की acting की।सब हँस पड़े।मैं बस मुस्कुरा रहा था।पता नहीं कब…Ananya अपनी chair छोड़कर उठी।Beer की bottle हाथ में लिए वो सीधे मेरी तरफ चली आई।मैंने सोचा किसी और से बात करेगी।

लेकिन वो मेरी बगल वाली chair खींचकर बैठ गई।इतनी सहजता से…जैसे हमेशा से वहीं बैठती हो।मैं थोड़ा सीधा होकर बैठ गया।

“सब ठीक?”

उसने मेरी तरफ देखा।

“कहाँ यार…”

उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।

लेकिन आँखों में नहीं।

मैंने bottle उठाते हुए पूछा,

“क्या हुआ?”

उसने एक लंबा sip लिया।

फिर बोली,

“लड़के…”

मैं हँस पड़ा।

“क्या?”

“आजकल के लड़के।”

मैंने मुस्कुराकर कहा,

“अच्छा…”

“किसने दिल तोड़ दिया?”

मैंने जानबूझकर मुस्कुराते हुए कहा,

“Mayank?”

उसने इतनी ज़ोर से आँखें घुमाईं कि मैं खुद हँस पड़ा।

“Oh please…”

“Mayank और मैं साथ नहीं हैं।”

“मैं थक गई हूँ सबको बताते-बताते।”

मैंने beer का sip लिया।

“मैं भी थक गया हूँ।”

वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही।

फिर अचानक उसकी उँगली मेरी तरफ उठ गई।

“तुम…”

मैंने भौंहें चढ़ाईं।

“मैं?”

“हाँ… तुम।”

पास बैठे दो लोग हमारी तरफ देखने लगे।मैं अभी भी मुस्कुरा रहा था।

उसने बिना पलक झपकाए कहा—

“Playboy.”

Table पर बैठे दो-तीन लोग हँस पड़े। मैं भी हँस दिया।लेकिन…वो नहीं हँसी।उसकी आँखों में गुस्सा था।असली वाला।ऐसा नहीं…जो दो मिनट में चला जाए।ऐसा…जो शायद बहुत दिनों से जमा हो।मैं कुछ बोलने ही वाला था कि उसने हाथ उठाकर मुझे रोक दिया।

“नहीं…”

“आज मेरी सुनो।”

उसकी आवाज़ पहले से थोड़ी ऊँची हो गई थी।पास वाली table के दो लोग भी हमारी तरफ देखने लगे।

Samyak ने दूर से आवाज़ लगाई—

“अरे… क्या हुआ? Problem kya hai?”

फिर उसने मेरी तरफ देखा।सीधे मेरी आँखों में।और पता नहीं क्यों…उस एक पल में मुझे ऐसा लगा…वो मुझे नहीं देख रही थी।वो मेरे जैसे हर लड़के को देख रही थी।पूरी table अब हमारी तरफ देखने लगी थी।कुछ लोगों को लगा वो नशे में थी।कुछ को लगा हमेशा की तरह किसी की खिंचाई कर रही होगी।मुझे भी पहले यही लगा।मैं कुछ बोलने ही वाला था कि उसने हाथ उठाकर मुझे रोक दिया।

“नहीं…”

“बीच में मत बोलना।”

“आज मेरी सुनो।”

उसने beer की bottle उठाई।

एक लंबा sip लिया।

फिर मेरी तरफ उँगली करके बोली,

“Problem पता है क्या है?”

“Problem ये है कि पता नहीं तुम लोगों ने प्यार को बना क्या दिया है।”

“Emotionally unavailable है…”

“Commitment issues हैं…”

“Situationship चाहिए…”

“I’m not sure about the future…”

“Past trauma से अभी बाहर नहीं आया हूँ…”

“Mujhe clarity नहीं है…”

“Let’s just go with the flow”

“I just want things casual…”

“I don’t know how I feel about you…”

उसने हँसते हुए हवा में हाथ घुमाया।

“क्या है ये सब?”

“कुछ भी terms यहाँ-वहाँ फेंक रहे हो यार।”

“एक इंसान अगर दूसरे इंसान को पसंद भी करता है…”

“…तो वो ये तक नहीं बोल पा रहा कि…”

“‘हाँ… मुझे तुम पसंद हो।'”

“‘हाँ… मुझे तुम बहुत ज़्यादा पसंद हो।'”

“‘हाँ… मैं तुमसे प्यार करता हूँ।'”

“इतना मुश्किल क्या है?”

वो रुकी नहीं।

लगातार बोलती चली गई।

“कितने ज़्यादा narcissist…”

“कितने self obsessed बन चुके हो तुम लोग…”

“एक message का reply देने में भी हज़ार बार सोचते हो।”

“‘क्या जवाब देना चाहिए?'”

“‘क्या नहीं देना चाहिए?'”

“‘अभी देना चाहिए या बाद में?'”

“‘Seen छोड़ दूँ?'”

“‘Reply करूँ तो कितना करूँ?'”

“‘कौन-सा emoji भेजूँ?'”

“‘Heart भेजूँ?'”

“‘Smiley भेजूँ?'”

“‘दो घंटे बाद reply करूँ?'”

“‘कल करूँ?'”

“‘नहीं… पहले story डाल देता हूँ।'”

पूरी table पर हल्की-सी हँसी फैल गई।

लेकिन वो नहीं हँसी।

उसकी आवाज़ पहले से और भारी हो गई।

“this is so not cool, ऐसे cool तुम लोग बनते हो”

“तुम लोग अपने आपको क्या समझ बैठे हो?”

“अभी की खूबसूरती…”

“अभी का status…”

“अभी के aesthetics…”

“Instagram…”

“Followers…”

“Likes…”

“Validation…”

“बस यही रह गया है?”

“दो लोग तारीफ़ कर दें…”

“…तो लगने लगता है दुनिया तुम्हारे इर्द-गिर्द घूम रही है।”

उसने bottle ज़ोर से table पर रखी।

आवाज़ पूरे terrace पर गूँज गई।

“अंदर से देखा है कभी खुद को?”

“कितने खाली हो तुम लोग?”

“कितना Pretend करते हो कि तुम लोगो को कोई फर्क नहीं पड़ता?”

“कितने खोखले हो?”

“कितने अकेले हो?”

उसकी उँगली अब भी मेरी तरफ थी।लेकिन अब मुझे नहीं लग रहा था…कि वो सिर्फ़ मुझसे बात कर रही है।शायद वो मेरे जैसे हर इंसान से लड़ रही थी।वो बिना रुके बोलती रही।

“Temporary लोग चाहिए…”

“Temporary feelings चाहिए…”

“Temporary relationships चाहिए…”

“Temporary excitement चाहिए…”

“क्यों?”

“क्योंकि options चाहिए।”

“सब try करना है।”

“हर तरह के लोग experience करने हैं।”

“हर जगह देखना है कि शायद इससे बेहतर कोई मिल जाए।”

“तो ठीक है…”

“करो।”

“लेकिन कम-से-कम honest तो रहो।”

“Kind तो रहो।”

“एक message का जवाब तो दे सकते हो।”

“अगर किसी के साथ future नहीं दिखता…”

“…तो बोल दो।”

“अगर feelings नहीं हैं…”

“…तो बोल दो।”

“अगर प्यार नहीं है…”

“…तो भी बोल दो।”

“लेकिन ये terms…”

“ये labels…”

“ये excuses…”

“ये games…”

“बंद कर दो यार।”

उसने एक गहरी साँस ली।

इस बार उसकी आवाज़ धीमी थी।

लेकिन पहले से कहीं ज़्यादा साफ़।

“थोड़ी self awareness की ज़रूरत है।”

“वरना…”

“सच बता रही हूँ…”

“कुछ साल बाद…”

“जब ये beauty नहीं रहेगी…”

“ये status नहीं रहेगा…”

“ये aesthetics नहीं रहेंगे…”

“ये Instagram नहीं रहेगा…”

“तब एहसास होगा…”

“…कि बहुत देर हो चुकी है।”

“तब चाहे जितनी कोशिश कर लेना…”

“प्यार महसूस नहीं कर पाओगे।”

“प्यार माँग नहीं पाओगे।”

“प्यार निभा नहीं पाओगे।”

“और पूरी ज़िंदगी…”

“…बस दिखावे में निकल जाएगी।”

वो पहली बार चुप हुई।

पूरी terrace पर ऐसा सन्नाटा था कि दूर सड़क पर निकलती गाड़ियों की आवाज़ तक सुनाई दे रही थी। किसी ने joke नहीं मारा। किसी ने glass नहीं उठाया। यहाँ तक कि सम्यक भी पहली बार बिना कुछ बोले उसे देख रहा था।

फिर उसने बहुत धीरे से कहा,

“सोचो ज़रा…”

अनन्या ने धीरे से beer की bottle उठाई, एक छोटा-सा sip लिया और कुर्सी पर पीछे टिक गई। जैसे उसके अंदर जो कुछ भी था, वो सब बाहर निकल चुका हो।

मैं अब भी उसे देख रहा था। सच कहूँ तो उसकी बातों से ज़्यादा, मैं उसे सुन रहा था। उसके बोलते हुए होंठ, गुस्से में सिकुड़ती हुई भौंहें, हर दूसरे वाक्य पर हवा में घूमता उसका हाथ… और उसकी आँखें। उनमें गुस्सा था, लेकिन सिर्फ़ गुस्सा नहीं। उनमें दर्द भी था। ऐसा दर्द, जो किसी एक इंसान से नहीं आता। कई लोगों से आता है। कई बार टूटने से आता है। या शायद… एक ही बार बहुत बुरी तरह टूटने से।

मुझे नहीं पता किसने उसका दिल तोड़ा था। या सच में किसी ने तोड़ा भी था या नहीं। लेकिन इतना समझ आ गया था कि ये बातें किताबों से नहीं आई थीं। ये ज़िंदगी से आई थीं।

उसे देखते-देखते मेरे दिमाग़ में एक-एक करके पुरानी बातें लौटने लगीं। पहले दिन induction में सुनाई हुई उसकी poem। Office के बाहर घायल कुत्ते को दूध पिलाना। Housekeeping staff से ऐसे बात करना जैसे वो भी उसी team का हिस्सा हों। हर नए employee का नाम दो दिन में याद कर लेना। Birthday भूलने पर लड़ जाना। किसी को अकेला बैठा देखकर बिना पूछे उसके पास जाकर बैठ जाना। सबसे पहले “Good Morning” बोलना। सबके लिए coffee order करना। और सबसे अजीब बात… वो कभी ये सब दिखाने के लिए नहीं करती थी। बस… उसका Nature था।

मैंने हमेशा ये सब देखा था, लेकिन कभी जोड़ा नहीं था। उस रात पहली बार सारे टुकड़े एक साथ जुड़ने लगे। मुझे हमेशा लगता था कि Ananya अच्छी लड़की है। लेकिन उस रात समझ आया… वो सिर्फ़ अच्छी नहीं थी। वो गहरी थी। उसे emotions समझ आते थे। खासकर इंसानों वाले emotions वो emotions जिनसे हम पूरी ज़िंदगी बचते रहते हैं, क्योंकि उनमें कुछ भी पूरी तरह सही या ग़लत नहीं होता। सब कुछ grey होता है। और शायद… इसी वजह से सबसे मुश्किल भी।

“अबे…”

Samyak ने माहौल हल्का करने की कोशिश की।

“हो गया TED Talk?”

पूरी table हँस पड़ी।

इस बार Ananya भी।

उसने bottle उठाकर Samyak की तरफ इशारा किया।

“चुप रह।”

“तू सबसे पहले सुधर।”

“मैंने क्या किया?”

“तू पैदा हुआ…”

“…वही काफ़ी है।”

पूरी table फिर हँस पड़ी।

अभी पाँच मिनट पहले जो सन्नाटा था, वो जैसे कभी था ही नहीं। मैं बस उसे देखता रह गया। अभी-अभी जो लड़की पूरी दुनिया से लड़ रही थी, वही अगले ही पल सबसे ज़ोर से हँस रही थी। ये switch मैं समझ नहीं पाया।

रात धीरे-धीरे खत्म होने लगी। लोग एक-एक करके उठने लगे। Bill आया। हमेशा की तरह पाँच लोग calculator निकालकर बैठ गए। तीन लोग अचानक गायब हो गए। दो लोग washroom चले गए। बाकी contribution का screenshot भेजने लगे। Corporate friendships की सबसे ईमानदार परीक्षा शायद Bill आने के बाद ही होती है।

मैं हँस पड़ा।

Ananya ने मेरी तरफ देखा।

“क्या हुआ?”

“कुछ नहीं।”

“फिर वही…”

“क्या?”

“‘कुछ नहीं।'”

“तुम्हारा favourite answer है।”

मैंने कंधे उचका दिए।

“हो सकता है।”

उसने मुस्कुराकर सिर हिलाया।

“एक दिन…”

“…तुम्हें बहुत कुछ बोलना पड़ेगा।”

मैं हँस दिया।

“Impossible.”

उस वक्त मुझे उसकी बात पर हँसी आई। क्योंकि मुझे सच में लगता था कि मैं अपने emotions किसी के सामने कभी नहीं रखूँगा। मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कुछ साल बाद मैं अपने ही दिमाग़ से भागता फिरूँगा। ये भी नहीं पता था कि एक दिन mental peace भी कोई चीज़ होती है, ये समझने के लिए मुझे पहाड़ों तक जाना पड़ेगा। और ये भी नहीं पता था कि कुछ सफ़र इंसान जगहों तक नहीं, अपने अंदर तक करता है खुद को समझने के लिए।

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