मोह
हाय… इतने दिनों बाद तुम्हें देखकर कितना सुकून आया।
तुम्हारी हँसी… पता नहीं क्या बातें कर रहे थे तुम अपने office वाले दोस्तों के साथ, पर यही तो मिस कर रही थी मैं — तुम्हारा यूँ खिलखिलाना, दोस्तों के साथ ऐसे खो जाना जैसे दुनिया में कोई बोझ ही ना हो, जैसे सब ठीक हो, सब सुकून हो।
शायद कहीं ना कहीं मैं चाहती थी कि जैसे तुम अपने दोस्तों के साथ रहते हो, वैसे मेरे साथ भी रहो — हल्के, खुले, बेफ़िक्र… और हमारे बीच कोई complications ना हों।
बस तुम हँसते रहो…
और मैं तुम्हें देखती रहूँ, बिल्कुल awestruck होकर।
पता नहीं कौन-सा color पहना था तुमने… purple था या bluish purple, नहीं पता।
पर इतने अच्छे लग रहे थे तुम।
तुम्हारी घड़ी, तुम्हारे बाल, तुम्हारा यूँ इधर-उधर फुदकते हुए चलना… कैसे देख लेती मैं तुम्हें जी भर के?
शायद मेरे आने से खुश थे तुम…
या शायद तुम ऐसे ही रहते हो।
ऐसे ही रहते होंगे।
मेरे होने ना होने से क्या ही फर्क पड़ता होगा तुम्हें।
पर मुझे पड़ता है…
तुम्हारी हर छोटी चीज़ से।
इतना कि साँस लेने से भी।
कभी-कभी सोचती हूँ कैसे साँस लूँ, कैसे खुद को समझाऊँ।
कल जो तुमने मोर वाला video डाला था ना…
जिसमें मोरनी उड़कर चली जाती है, और वो मोर इतना सुंदर, इतना colorful लग रहा था… बिल्कुल तुम्हारी तरह।
सुंदर।
और वो उसे ढूँढता रहता है।
सोचा था तुम्हारे status के जवाब में कुछ लिखूँगी… कुछ ऐसा जिससे तुम्हें पता चले कि मैं अब भी तुम्हारी परवाह करती हूँ।
पर अब ना दिखा सकती हूँ, ना जता सकती हूँ, ना बता सकती हूँ।
पता नहीं तुम मुझसे बात भी करोगे या नहीं।
क्योंकि अगर मैंने फिर से बात की तुमसे…
तो शायद मैं फिर कभी तुमसे दूर ना रह पाऊँ।
और यहाँ अब बचा भी क्या है हमारे बीच।
ये सब ऐसे ही चलता रहा ना… तो मेरा दिल सच में टूट जाएगा।
मैं तुम्हें चाहूँगी — अपने जिस्म से, अपने मन से, पूरे दिल-ओ-जहाँ से।
और तुम शायद कभी उतना नहीं चाहोगे मुझे, जितना मैं चाहती हूँ तुम्हें।
वो ख़्वाब ही क्या जो पूरा हो जाए…
कि मैं तुम्हारी हो जाऊँ और तुम मेरे।
कि पल भर के लिए तुम सब भूल जाओ… और बस मुझसे प्यार कर लो, उतना ही जितना मैं तुमसे करती हूँ।
पता नहीं ये प्यार है या दीवानापन।
बस इंतज़ार कर रही हूँ कि किसी दिन खत्म हो जाए सब, मैं भूल जाऊँ तुम्हें।
पर तुम इतने आसान कहाँ हो।
तुमने बस एक गाना डाला था…
और मैं उसे ना जाने कितनी बार सुन चुकी हूँ।
शायद तुम्हारे अंदर भी बहुत सारे सवाल होंगे।
या शायद नहीं भी।
पर अगर कभी ध्यान से महसूस करोगे ना… तो जवाब मिल जाएँगे तुम्हें।
बस मेरे दिल को वो नहीं मिल पाएगा जो वो ढूँढ रहा है —
तुम।
तुम… वैसे जैसे मैंने महसूस किया था तुम्हें।
Unedited, unaltered.
खुले दिल वाला वो इंसान, जिसे मैंने अपनी बाँहों में भरकर महसूस किया था…
जिसकी धड़कन अपने जिस्म में महसूस की थी मैंने।
उलझी हुई मैं भी बहुत हूँ।
समझ नहीं आता कैसे समझाऊँ ये सब।
तुम्हारे चलने में भी ना… एक अजीब-सी उदासी है।
पता नहीं तुम क्या चाहते हो मुझसे।
अंदर से उदास हो? किस बात से?
या ये सब बस मेरी ही उलझी हुई कल्पनाएँ हैं।
पर मुझे हमेशा लगा…
कि तुमने भी मुझे उतनी ही शिद्दत से चाहा था, जितनी शिद्दत से मैंने तुम्हें।
दिन-रात परेशान रहती हूँ।
रातों में नींद भी नहीं आती।
बस तुम्हारे चुने हुए गाने सुनती रहती हूँ… और सोचती रहती हूँ — क्या सोच रहे होगे तुम, कैसे होगे तुम।
तुम्हारी song choice ना… उसकी तो मैं fan हूँ।
और तुम्हारी हँसी…
आज भी दिल को ऐसे दर्द दे जाती है कि बस मन करता है —
एक बार तुम सामने हो, अपने दोस्तों में खोए हुए, अपनी दुनिया में खुश…
और मैं तुम्हें बस देखती रहूँ, बिना पलक झपकाए।
कुछ लोग दिल में इतनी चाहत जगा देते हैं…
पर शायद हमारी सेहत के लिए अच्छे नहीं होते।
ऐसा नशा हो तुम।
कि rehab में भी जाऊँ ना, तो शायद ठीक ना हो पाऊँ।
सोचती हूँ अगर तुम सच में दूर हो गए…
दिखना बंद हो गए…
तो कैसे रहूँगी तुम्हारे बिना।
इसलिए शायद अभी से दूर हो जाना बेहतर है।
अभी ही इतनी टूटी हुई हूँ…
और अगर और टूटी, तो शायद संभल नहीं पाऊँगी।
आज इतने दिनों बाद दिखे हो…
और दिल कर रहा था बस गले लगा लूँ तुम्हें।
एक महीना हो गया तुम्हें block किए हुए।
और ये एक महीना मेरे जीवन का सबसे मुश्किल महीना था।
तुमसे भाग रही थी शायद… इसलिए office आना भी मुश्किल लगने लगा था।
तुमसे दूर रहकर एक-एक दिन गिन रही हूँ…
इतने दिन हो गए, पूछा भी नहीं क्या हुआ है?
कैसी हो? मैं ही पागल हूं तुम्हारे लिए, तुम इतना सोच भी नहीं
रहे होंगे मेरे बारे।
बहुत कोशिश की थी इन जज़्बातों को बंद करके रखने की… कि वापस बाहर ना आएँ।
पर फिर आ गए।
दिल सच में बहुत पागल है मेरा।
अब संभलता ही नहीं।
इसलिए दूर ही अच्छे हो।
खुश रहना…
तुम्हें खुश देखना आज भी अच्छा लगता है मुझे।

