अजनबी
आज फिर तुम्हारी याद ने मुझे हर जगह से घेर लिया। दारु भी पी ली तुम्हें भूलाने के लिए…एकदोतीनचार दर्द बढ़ने लगा,आंसू बहने लगे। सोचा था शायद कुछ देर के लिए दिल हल्का हो जाएगा।पर यादें शराब से नहीं धुलतीं।वो और गहरी हो जाती हैं। मैं आज तुम्हें भूलने गई थी,लेकिन हर दीवार पर वही…