Part 14

अगली सुबह मेरी आँख हमेशा की तरह पाँच बजे खुल गई। कुछ पल मैं यूँ ही छत देखता रहा। फिर आदत के मुताबिक़ phone उठाया और Instagram खोल लिया। Request अब भी pending थी। उसकी profile के नीचे वही छोटा-सा शब्द लिखा था—Requested. बस इतना ही। मैंने phone सीने पर रख लिया। कमरे में बिल्कुल सन्नाटा था। बाहर अभी रोशनी भी ठीक से नहीं हुई थी। पता नहीं क्यों, पिछले चौबीस घंटे बार-बार दिमाग़ में घूम रहे थे। Traffic signal पर request भेजने से पहले जितना सोचा था, उससे कहीं ज़्यादा मैं उसके बाद सोच रहा था।

मैं ऐसा कभी नहीं था। या शायद… हमेशा से था। मैं लोगों से नहीं, अपने ही दिमाग़ से हार जाता था। किसी को अपनी पूरी दुनिया देकर एक बार खुद को खो चुका था। उसके बाद मैंने अपने अंदर कुछ दरवाज़े हमेशा के लिए बंद कर दिए थे। इसलिए शायद किसी नए एहसास से ज़्यादा मुझे अपने बदलने से डर लगता था।

पता नहीं Ananya में ऐसा क्या था। उसकी बातें… या उन्हें कहने का तरीका। Friday की रात उसने जो कुछ कहा था, वो किसी philosophy की तरह नहीं लगा था। ऐसा लगा था जैसे वो अपनी कहानी नहीं सुना रही… किसी ऐसी चीज़ का नाम ले रही हो जिसे मैं भी कभी महसूस कर चुका था, लेकिन शब्द कभी मिले ही नहीं। कुछ chapters शायद बंद ही अच्छे लगते हैं। मैंने phone वापस रखा, कपड़े बदले और gym के लिए निकल गया।

पूरी workout के दौरान ध्यान कहीं टिक ही नहीं रहा था। Music चल रहा था, लोग अपने-अपने sets पूरे कर रहे थे, लेकिन मेरे अंदर जैसे कोई पुराना कमरा फिर से खुलने लगा था। मैं जितना उसे बंद करना चाहता, उतनी ही पुरानी आवाज़ें लौट आतीं। Gym से निकलकर सीधे office के लिए निकला। दिल्ली की सुबह अभी पूरी तरह जागी नहीं थी। सड़कों पर traffic कम था। गाड़ी अपने-आप चल रही थी और दिमाग़ कहीं और।

Office पहुँचकर laptop खोला। System boot होने में हमेशा की तरह थोड़ा समय लगा। जाने क्यों पहली बार मैंने Company Portal पर search किया—Ananya Bhardwaj. Profile खुल गई। Joining date, Department, Employee ID… सब कुछ सामने था। फिर Facebook, फिर Instagram, फिर WhatsApp। हर जगह वही एक profile photo। मैं कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा। अजीब बात थी। हम एक ही office में थे, दो साल पहले भी थे, लेकिन कभी अकेले बैठकर पाँच मिनट बात नहीं हुई थी।

मैं खुद पर हल्का-सा मुस्कुरा दिया। मैं लोगों को observe तो बहुत करता था… लेकिन उनके पास जाने की हिम्मत हमेशा कम पड़ जाती थी। Amsterdam ने मुझे बहुत कुछ सिखाया था। अलग-अलग देशों के लोग, अलग-अलग रिश्ते, अलग-अलग तरह की ज़िंदगियाँ। मैंने लोगों को बदलते देखा था, बिखरते देखा था, फिर संभलते भी देखा था। इतना ज़रूर समझ गया था कि हर इंसान को एक जैसा नहीं पढ़ा जा सकता।

फिर भी… Ananya मेरे लिए अब भी एक पहेली थी। ना वो impress करने की कोशिश करती थी, ना distance बनाती थी, ना कभी ज़्यादा करीब आई, ना कभी पूरी तरह दूर गई। मैंने अनायास पहली bay की तरफ देखा। उसकी seat अब भी खाली थी। मुझे खुद पर हैरानी हुई। कल रात से पहली बार मुझे सचमुच उसका इंतज़ार हो रहा था। एक छोटी-सी Instagram request… और मैं इतना बेचैन? मैंने सिर झटककर Gmail खोल लिया।

करीब आधे घंटे बाद coffee लेने उठा। Pantry के बाहर Samyak और Rohit मिल गए।

“आ गया, philosopher?” Samyak ने हँसते हुए मेरी तरफ़ black coffee बढ़ाई।

“ले… तेरी बिना चीनी वाली।”

“Thanks,” मैंने कहा।

Coffee लेकर मैं pantry की बड़ी glass window के पास जाकर खड़ा हो गया। बाहर आसमान हल्का नीला होने लगा था। सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था। उस रंग को देखते ही जाने क्यों घर याद आ गया—धर्मशाला। सुबह की ठंडी हवा, दूर दिखाई देते पहाड़ और वो सन्नाटा… जो दिल्ली में कभी नहीं मिलता।

“वैसे Sugandh… तू कहीं Himachal का है ना?” पीछे से Rohan की आवाज़ आई।

मैंने मुड़कर देखा। Fresher batch के चार-पाँच लड़के मेरी तरफ चले आ रहे थे—Nav, Aman, Dheeraj और Ankit। सबके हाथ में coffee के mugs थे।

“हाँ, पहाड़ भी मेरे हैं,” मैं मुस्कुराया।

“यार तभी… तेरा vibe भी वैसा ही है,” Nav हँस पड़ा।

सब हँसने लगे। बातें मौसम से शुरू होकर trekking, snowfall और travel तक पहुँच गईं। मैं सबसे बात कर रहा था, लेकिन जाने क्यों मेरी नज़र बार-बार अपने बाएँ हाथ पर चली जाती। Tattoo। उँगलियाँ अनायास उसी पर फिर गईं।

और उसी पल… एक पुरानी शाम याद आ गई। कुशा की शादी। Lawn के एक कोने में खड़े-खड़े Ananya ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया था।

“ये tattoo…” उसने बहुत ध्यान से उसे देखा था।

“बस design है… या कोई कहानी भी है?”

“Story लंबी है,” मैंने हँसकर बात टाल दी थी।

उसने tattoo से नज़र हटाकर मेरी आँखों में देखा था।

“तुम चीज़ें छुपाते बहुत हो।”

“इतना obvious हूँ?”

“नहीं,” वो मुस्कुराई थी, “इसीलिए तो।”

उस वक़्त मैं कुछ नहीं बोला था। आज भी नहीं समझ पा रहा था कि उसने tattoo देखा था… या मुझे।

“सुना है Ananya resign कर रही है,” अचानक Aman की आवाज़ ने मेरी सोच तोड़ दी।

मैंने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“क्या?”

“कल papers डाल दिए उसने।”

“कहाँ जा रही है?”

“पता नहीं भाई, सुना है notice period चल रहा है,” Rohit ने कंधे उचकाए।

Nav ने माहौल हल्का करने के लिए गाना शुरू कर दिया—”ये ज़िंदगी हमें किस मोड़ पर ले आई…”

“हम तो यहीं अटके रह जाएँगे भाई,” Dheeraj हँसते हुए बोला।

अगले ही पल Nav फिर गुनगुनाने लगा—”चला जाता हूँ किसी की धुन में… धड़कते दिल के तराने लिए…”

बाकी सब उसकी खिंचाई करने लगे।

“चलो… सिगरेट वाले नीचे चल रहे हैं,” Samyak बोला।

सब धीरे-धीरे pantry से बाहर निकल गए। मैं कुछ देर वहीं खड़ा रहा। Coffee अब ठंडी हो चुकी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि एक ऐसी खबर ने मुझे इतना बेचैन क्यों कर दिया… जिससे मेरा कोई सीधा रिश्ता ही नहीं था। नीचे tapri पर सब लोग अपनी-अपनी बातों में लगे हुए थे।

“कौन-सी company जा रही है?”

“Package अच्छा मिला होगा।”

“Mayank भी जा रहा है क्या?”

“नहीं… वो दोनों साथ नहीं हैं,” Mayank का नाम सुनते ही मैंने अनायास कहा।

Aman ने मेरी तरफ देखा।

“बड़ा defend कर रहा है उसे।”

“बस… जितना पता है उतना बोल रहा हूँ,” मैं मुस्कुरा दिया।

“चार दिन हुए वापस आए हुए… और तुझे उससे ज़्यादा पता है जितना हमें।”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं हमेशा से अपनी दुनिया कम ही खोलता था। शायद इसलिए लोग मुझे उतना ही जानते थे जितना मैं उन्हें जानने देता था। बाकी कहानी… हमेशा मेरे पास ही रह जाती थी।

करीब साढ़े दस बजे मैं वापस अपनी seat पर आ गया। पहली bay की तरफ देखा। उसकी chair अब भी खाली थी। मैंने खुद को समझाया—Resignation के बाद शायद office कम आ रही होगी। Laptop खोला। काम शुरू किया। एक mail, दूसरी mail, तीसरी… करीब बीस मिनट बाद जाने क्यों मेरी नज़र फिर उसी तरफ उठी। इस बार वो आ चुकी थी। जैसे हमेशा आती थी। Laptop खुला हुआ, बाल हल्के-से पीछे किए हुए, पूरी तरह screen पर झुकी हुई।

मैंने बिना सोचे phone उठाया। Instagram खोला, उसकी profile खोली। नीचे अब भी वही लिखा था—Requested. मैं कुछ सेकंड तक उसी screen को देखता रहा। Requested. बस एक शब्द। मैंने phone lock किया और वापस laptop की तरफ देखने लगा। खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था कि ये कोई बड़ी बात नहीं है। हो सकता है उसने Instagram खोला ही ना हो। हो सकता है उसने notifications देखी ही ना हों। और अगर देख भी ली हों… तो हर request accept करना भी ज़रूरी तो नहीं होता।

फिर भी… जाने क्यों दिन भर मेरी नज़र बार-बार उसकी तरफ उठ जाती। वो कभी किसी से कुछ discuss कर रही होती, कभी headphones लगाकर screen पर झुक जाती, कभी अपनी notebook में कुछ लिखती। दोपहर तक मुझे उसकी आधी आदतें याद होने लगी थीं। Mail पढ़ते समय वो हमेशा दाहिने हाथ से बाल कान के पीछे करती थी। किसी बात पर हँसती तो पहले सिर थोड़ा नीचे करती, फिर हँसती। Teams call पर होती तो सामने रखी bottle का cap बिना वजह घुमाती रहती। मैं खुद पर ही हँस पड़ा। मैं ये सब कब से notice करने लगा? या… क्या मैं हमेशा से notice करता था और आज पहली बार मुझे इसका एहसास हुआ था?

दोपहर का ज़्यादातर समय काम में निकल गया। Meetings थीं, reviews थे, कुछ production issues भी आ गए थे। बीच-बीच में पूरा floor अपनी रफ्तार बदलता रहता। कोई जल्दी में इधर से उधर भागता, कोई किसी desk के पास खड़ा होकर discussion करने लगता। उन सबके बीच Ananya भी उसी तरह अपने काम में लगी रही। अगर कोई उसे दूर से देखता, तो शायद यही कहता कि वो बिल्कुल सामान्य दिन था। शायद बाहर से देखने पर हर दिन सामान्य ही लगता है। बदलाव हमेशा अंदर शुरू होता है।

करीब चार बजे किसी discussion के दौरान उसने पहली बार मेरी तरफ देखा। बस एक पल। फिर वापस अपनी screen की तरफ देखने लगी। मैं भी वैसे ही काम करता रहा, लेकिन जाने क्यों उस एक नज़र ने पूरे दिन की थकान जैसे थोड़ी हल्की कर दी। शाम तक आते-आते मुझे एक और बदलाव महसूस हुआ। मैंने खुद को थोड़ा ठीक से बैठाना शुरू कर दिया था। Shirt की sleeves बराबर कर लीं, desk पर बिखरे papers एक तरफ रख दिए, laptop के पास रखा coffee mug हटा दिया। ये सब मैं किसी और के लिए नहीं करता था। आज कर रहा था। और शायद पहली बार मुझे इसकी वजह भी समझ नहीं आ रही थी। दो दिन पहले तक मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि office में कौन मुझे notice करता है और कौन नहीं। आज… पता नहीं क्यों… पड़ने लगा था।

उस हफ़्ते के बीच में HR का एक mail आया—Fun Activity – Mandatory for Everyone. शाम को लगभग पूरा floor नीचे auditorium में इकट्ठा था। किसी को इस तरह की activities पसंद थीं, किसी को नहीं। फिर भी सब आए हुए थे। HR ने कुछ games तैयार किए थे। एक bowl में अलग-अलग फिल्मों के नाम थे। हर किसी को एक chit उठानी थी, उसमें से कोई एक word चुनना था और उसी पर कुछ बोलना था। किसी के हिस्से Zindagi Na Milegi Dobara आई, किसी के पास Rockstar। किसी ने “Friendship” चुना, किसी ने “Journey”। पूरा hall हँसी और शोर से भरा हुआ था। लोग एक-दूसरे की खिंचाई कर रहे थे, बीच-बीच में ताली बजा रहे थे। Office के लोग जब काम से बाहर आते हैं तो अचानक बिल्कुल अलग इंसान लगने लगते हैं।

फिर Ananya का नाम पुकारा गया। उसने bowl में हाथ डालकर एक chit निकाली। Movie थी—Love Aaj Kal.

उसने कुछ पल उसे देखा, फिर मुस्कुराकर बोली, “Word… Love.”

Hall में किसी ने सीटी बजा दी। सब हँस पड़े। Ananya भी हँस दी।

फिर उसने mic थोड़ा नीचे किया, “प्यार क्या है? Notice करना।”

उसने बिना किसी जल्दबाज़ी के अपनी बात जारी रखी।

“कौन है यहाँ… जिसे ये पता हो कि तुम्हें coffee ज़्यादा पसंद है या चाय?”

“कौन है जिसे पता हो कि तुम अपनी favourite candy हमेशा bag में रखते हो… क्योंकि तुम्हें पता है कि खराब mood में वही सबसे पहले काम आएगी?”

पूरा hall धीरे-धीरे शांत होने लगा। मैं अनायास उसकी तरफ देखना शुरू कर दिया।

“किसी को पता है कि तुम्हें भिंडी के साथ दही खाना पसंद है?”

“जब किसी को ये पता हो कि धूप में निकलते ही तुम्हारी आँखें अपने-आप बंद हो जाती हैं… इसलिए तुम सुबह जल्दी निकलना पसंद करते हो… या देर रात।”

उसकी आवाज़ बिल्कुल वैसी ही थी जैसी induction वाले दिन कविता सुनाते समय थी—धीमी, लेकिन सच्ची।

“जब किसी को ये पता हो कि तुम Maggie में दो मसाले डालते हो.”

“जब किसी को पता हो कि बारिश में भीगने से ज़्यादा तुम्हें बस बारिश देखते रहना पसंद है.”

“जब phone का notification आते ही तुम्हारे चेहरे पर खुशी भी आती है… और थोड़ी-सी बेचैनी भी… क्योंकि बात करनी तो है… लेकिन क्या करनी है… ये नहीं पता.”

अब पूरे hall में कोई नहीं बोल रहा था।

“जब किसी को ये पता हो कि office में तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त कौन है… किसके साथ तुम्हारी back-to-back coffee breaks लगती हैं…” उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ mic थोड़ा और पास किया।

“Love is just about noticing.”

कुछ सेकंड तक उसने कुछ नहीं कहा, फिर धीरे से बोली।

“जब कोई बिना शोर किए… तुम्हारी आदतें notice करता रहे। तुम्हारी खुशियाँ… तुम्हारी चुप्पियाँ… तुम्हारी परेशानियाँ.”

“Someone who notices life with you.”

“That’s it.”

“मेरे लिए… प्यार बस इतना ही है.”

Hall तालियों से गूँज उठा। किसी ने “Beautiful!” कहा, किसी ने सीटी बजाई। HR भी मुस्कुरा रही थी। लेकिन मैं… मैं तालियाँ बजाना भूल गया था। मेरे सामने stage पर Ananya खड़ी थी, और पहली बार मुझे लगा… मैं पिछले तीन सालों से क्या कर रहा था। मैंने कभी उससे ज़्यादा बातें नहीं की थीं, ना कभी उसके साथ coffee पी, ना उसे कहीं बाहर चलने को कहा, ना उसे जानने की कोशिश की।

फिर भी… मुझे पता था कि उसे black coffee पसंद है। Meeting में सोचते समय वो pen घुमाती है। हँसते हुए हमेशा बाल कान के पीछे करती है। Lunch में दाल से ज़्यादा salad खाती है। Friday को ethnic पहनना उसे अच्छा लगता है। Presentation शुरू होने से पहले हमेशा एक गहरी साँस लेती है। मैंने ये सब कभी याद करने की कोशिश नहीं की थी। ये सब अपने-आप याद रह गया था। शायद… मैं उसे समझ नहीं रहा था। मैं बस… उसे notice कर रहा था। और शायद… यही बात मुझे सबसे ज़्यादा डराने लगी थी।

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