महाकाल

सावन शुरू हो चुका है।

मैं खुद को महादेव की बहुत बड़ी भक्त भी नहीं मानती। फिर भी, तुम मुझे जाने-अनजाने उस रास्ते पर वापस ले आए हो, जहाँ मैं कई साल पहले हुआ करती थी—महादेव के पास।

शायद प्यार ऐसा ही होता है। वह सिर्फ किसी इंसान के करीब नहीं ले जाता, बल्कि धीरे-धीरे भगवान की तरफ भी ले जाने लगता है।

मुझे पहले लगता था कि हमारी कहानी उस दिन शुरू हुई थी, जब तुमने कहा था:

“मैं अपने बारे में नहीं सोचता।”

पता नहीं उस एक sentence में ऐसा क्या था। मुझे लगा जैसे तुमने बिना कुछ कहे अपने अंदर के सालों का सारा हिसाब मेरे सामने रख दिया हो। जैसे उस एक बात में तुम्हारी थकान, तुम्हारी जिम्मेदारियाँ और वह सब कुछ छिपा था, जो तुम शायद दुनिया को नहीं दिखाते।

शायद मुझे तुमसे प्यार वहीं हुआ था।

लेकिन अब लगता है कि मैं गलत थी। हमारी कहानी उस sentence से नहीं, बल्कि उस महाकाल की keychain से शुरू हुई थी, जो महाकाल से आई थी।

मेरी best friend महाकाल गई थी और हम दोनों के लिए दो keychains लाई थी। मेरी वाली यहाँ टूट गई। तुम्हारी वाली का पता नहीं—अभी भी संभालकर रखी है, टूट गई है या कहीं खो गई।

पर कभी-कभी लगता है कि वह सिर्फ एक keychain नहीं थी। जैसे महाकाल ने उसके जरिए तुम्हारी और मेरी आत्मा को कुछ याद दिलाया हो।

महाकाल—समय और मृत्यु से परे।

शायद इसीलिए कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारा रिश्ता भी समय की समझ से थोड़ा परे है। हो सकता है मैं ज्यादा सोच रही हूँ। जब feelings नई होती हैं, तब हर चीज में कोई इशारा दिखने लगता है।

लेकिन पिछले कुछ महीनों में काल का चक्र इतनी तेजी से घूमा है कि मुझे समझ ही नहीं आया—क्या हुआ, कैसे हुआ और क्यों हुआ।

बस मेरा मन यह मानने लगा कि कुछ तो है, जो मेरी समझ से बाहर है।

हम दोनों बिल्कुल आम इंसान हैं। हमारे अंदर वही कमियाँ हैं, जो हर इंसान में होती हैं। न हम पूरी तरह शुद्ध हैं, न spiritually awakened। हम गलतियाँ करते हैं। हमारे अंदर गुस्सा, लालच, वासना, डर और insecurities सब हैं।

फिर भी, कभी-कभी लगता है जैसे कोई चीज हमें अंदर से जगाने की कोशिश कर रही है।

हो सकता है कि मैं चीजों को जितना complicated बना रही हूँ, वे असल में उतनी complicated हों ही न। और हो सकता है कि तुम और मैं किसी ऐसी कहानी का हिस्सा हों, जो इस जन्म में शुरू नहीं हुई—सिर्फ इस जन्म में दोबारा हमारे सामने आ गई हो।

मैं नहीं जानती इसका सच क्या है।

मैं सिर्फ इतना जानती हूँ कि मेरा मन तुमसे अजीब तरह से बँध गया है।

चाहे हमारे बीच कुछ हो या न हो। चाहे तुम्हारी तरफ से कभी वैसी कोई feeling रही हो या नहीं। मेरे अंदर कहीं एक एहसास है, जो बार-बार कहता है—जैसे तुम मेरे अपने हो और मैं तुम्हारी।

कभी-कभी खुद पर हँसी भी आती है। सोचती हूँ, किसी इंसान से जिस्म और रूह इतनी गहराई से कैसे जुड़ सकते हैं कि उसमें शिव और शक्ति का एहसास होने लगे?

मुझे जिंदगी में पहले भी प्यार हुआ है। लेकिन तुमसे जो हुआ, वह क्या है, मुझे आज तक समझ नहीं आया।

अधूरा ही सही, पर तुम्हारा होना मेरे अंदर कुछ जगाता तो है। तुमने मुझे मेरे ही अंदर किसी ऐसी जगह से मिला दिया है, जिसके बारे में मैं खुद भी नहीं जानती थी।

मैंने अपने मन में एक वादा भी कर लिया है—मैं उन जगहों पर जाना चाहती हूँ, जहाँ तुम गए हो। उन रास्तों को देखना चाहती हूँ, उन पहाड़ों और मंदिरों को महसूस करना चाहती हूँ, जिन्होंने तुम्हें कभी छुआ होगा।

मैं तुम्हारे अंदर छिपे उस पागलपन को समझना चाहती हूँ, जो तुम दुनिया से छिपा लेते हो। तुम्हारा stress, तुम्हारी anxiety, तुम्हारे डर और तुम्हारी उलझनें—सब।

कभी-कभी मन करता है कि तुम्हारा सारा दर्द अपने पास रख लूँ और तुम्हें उससे आजाद कर दूँ।

मैं जानती हूँ कि किसी की healing कोई दूसरा इंसान नहीं कर सकता। Healing हमेशा खुद के अंदर से आती है। लेकिन मैं यह भी मानती हूँ कि जब किसी के लिए दिल सच में जुड़ जाता है, तो उस प्यार की कुछ न कुछ energy उसकी आत्मा तक जरूर पहुँचती होगी।

मैं दिनभर तुम्हारे बारे में सोचती हूँ।

कभी लगता है जैसे तुम्हें सोचना ही मेरा काम बन गया है। सोते वक्त आखिरी ख्याल तुम होते हो और आँख खुलते ही पहला ख्याल भी तुम।

हर गाने में, हर सोच में और हर छोटी-सी बात में तुम याद आ जाते हो।

ऐसा नहीं है कि मुझे हर वक्त तुम्हारा मेरे पास होना जरूरी लगता है। तुम physically मेरे साथ न भी हो, फिर भी तुम मेरे मन, मेरी सोच और मेरे दिल में साथ ही रहते हो।

तुमने मेरे दिल में धीरे-धीरे एक घर बना लिया है। पहले एक छोटी-सी जगह बनाई, फिर एक-एक करके अपनी चीजें जमा करते गए—तुम्हारी मुस्कुराहट, तुम्हारी बातें, तुम्हारी बदतमीज़ियाँ, तुम्हारी insecurities और तुम्हारा बचपना।

तुम्हारा अपने बालों को लेकर परेशान होना—“मैं ऐसे कैसे जाऊँगा, बाल बेकार हैं”—मुझे आज भी याद आता है।

तुम्हें शायद खुद में बहुत कमियाँ दिखती हैं, लेकिन मुझे तुम जैसे भी हो, बहुत खूबसूरत लगते हो।

प्यार होने के लिए हमेशा कोई वजह नहीं चाहिए होती। वह बस हो जाता है।

लेकिन फिर भी, आज मैं तुम्हें बताना चाहती हूँ कि मुझे तुमसे सच में प्यार क्यों हुआ।

न सिर्फ तुम्हारे looks की वजह से। हाँ, तुम सुंदर हो। तुम्हारी height अच्छी है, तुम पहाड़ी हो, self-dependent हो और तुम्हारी personality में एक अलग attraction है।

तुम थोड़े naughty हो, थोड़े बच्चे हो और कभी-कभी बहुत impulsive भी। तुम चाहते हो कि सब कुछ तुम्हारे हिसाब से चले। तुम्हारे अंदर एक soft-सा इंसान भी है, जिसे शायद तुम खुद दुनिया से बचाकर रखते हो।

कभी-कभी मुझे डर भी लगता है कि कोई तुम्हारे अंदर के उस soft इंसान को समझकर तुम्हारा फायदा न उठा ले।

मुझे तुम्हारी इन सब चीजों से प्यार है।

तुम्हारी शरारतों से भी। तुम्हारे साथ वह सब कहना और महसूस करना अच्छा लगता था, जो मैंने पहले किसी के साथ नहीं किया था।

मैं हमेशा सही-गलत, respectable और “ऐसा होना चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए” जैसे rules के बीच जीती रही। लेकिन तुम्हारे साथ पता नहीं क्यों, अपनी सारी हिचकिचाहट छोड़ देने का मन करता था।

तुम्हारे साथ अपनी desires को स्वीकार करना मुझे गलत नहीं लगा। तुम्हारी बदतमीजियों पर गुस्सा कम और प्यार ज्यादा आता था। तुमने मेरे अंदर के उस हिस्से को जगाया, जिसे मैं शायद खुद भी हमेशा छिपाती रही थी।

लेकिन इन सब से पहले और इन सब से ज्यादा, मुझे उस इंसान से प्यार हुआ, जिसने एक दिन बस इतना कहा था:

“मैं अपने बारे में नहीं सोचता।”

उस sentence में मुझे तुम्हारा दिल दिख गया था।

पता नहीं तुमने वह बात कितनी casually कही थी, लेकिन मेरे लिए वह मामूली नहीं थी। मुझे लगा जैसे तुम हमेशा दूसरों के लिए जीते-जीते खुद को कहीं पीछे छोड़ आए हो।

शायद उसी पल मेरा दिल तुम्हारे पास रह गया।

तुम्हारे पास भी अपनी बेड़ियाँ होंगी। मेरे पास भी अपनी मजबूरियाँ हैं। समाज है, उसूल हैं, हालात हैं और कुछ ऐसी boundaries हैं, जिन्हें हम सिर्फ चाहने भर से मिटा नहीं सकते।

लेकिन प्यार पर किसकी बंदिश चलती है?

हम क्या कर सकते हैं, कहाँ तक जा सकते हैं और हमारा रिश्ता क्या नाम ले सकता है—इन सब पर दुनिया और हालात का हक हो सकता है।

लेकिन मेरे अंदर तुम्हारे लिए कितना प्यार रहेगा, इस पर किसी का हक नहीं है।

मैं तुम्हें बाँधना नहीं चाहती। मैं यह भी नहीं चाहती कि मेरा प्यार तुम्हारे लिए कोई बोझ या pressure बन जाए।

तुम अपनी जिंदगी जीना। मुकम्मल होकर जीना। इतनी खूबसूरत जिंदगी जीना कि लोग तुम्हें देखकर रश्क करें और मेरा दिल बस इतना कहे—

काश यह मोहब्बत मेरे नसीब में होती तो क्या होता।
काश यह हाथ और यह साथ मेरे नसीब में होता तो क्या होता।

मलाल शायद हमेशा रहेगा कि इतना खूबसूरत इंसान मेरी जिंदगी में आया तो, लेकिन मेरा बनकर क्यों नहीं आया।

फिर लगता है, मिलने का वक्त कभी बेवक्त नहीं होता।

शायद हम सही वक्त पर मिलते तो यह प्यार ही नहीं होता। शायद तब हम एक-दूसरे को इतनी गहराई से महसूस ही नहीं कर पाते।

इसलिए मैं हमारे मिलने को गलत नहीं कह सकती।

अधूरा कह सकती हूँ। मुश्किल कह सकती हूँ। कभी-कभी तकलीफ देने वाला भी कह सकती हूँ।

लेकिन गलत नहीं।

तुम मेरे हुए या नहीं, यह शायद जिंदगी तय करेगी। लेकिन तुमने मेरे अंदर जो जगाया है, वह हमेशा मेरा रहेगा।

तुमने मुझे दोबारा महादेव के पास पहुँचाया। तुमने मुझे अपने अंदर के प्यार, पागलपन, desire और रूहानियत से मिलाया।

और शायद हमारी कहानी का मतलब एक-दूसरे को पाना नहीं था।

शायद उसका मतलब सिर्फ एक-दूसरे को जगाना था।

हर हर महादेव।

A Special Note for Ravi

Hi Ravi, if you’re reading this, I’ve finally added the much-requested audio version of the blog.Thank you for always inspiring me to do better. From now on, I’ll try to include an audio version with every blog I write.This is my first recording, and I’m still getting used to hearing my own voice—so please be kind!I hope you enjoy it.

Listen to this blog in my voice.


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Author: Onesha

She is the funny one! Has flair for drama, loves to write when happy! You might hate her first story, but maybe you’ll like the next. She is the master of words, but believes actions speak louder than words. 1sha Rastogi, founder of 1shablog.com.

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