बचपन

bachpan

कुछ पल ज़िंदगी में ऐसे आते हैं जो दिखने में बहुत छोटे होते हैं,
पर दिल में हमेशा के लिए घर बना लेते हैं।
ना वो किसी बड़ी जगह पर बिताए जाते हैं,
ना उनमें कोई महंगी चीज़ें होती हैं…
फिर भी वही पल सबसे ज्यादा अमीर बना जाते हैं।

कल सुबह ऐसा ही एक पल मेरी ज़िंदगी में आया।

आज दो तारीख है।
मेरे छोटे बेटे के बर्थडे का महीना शुरू हो चुका है।
सुबह मैं ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रही थी कि अचानक मेरे पति बोले,
“चलो इसे एक राउंड घुमा लाते हैं।”

बस फिर क्या था…
मेरा छोटा सा बेटा गाड़ी में मेरी गोदी में आकर बैठ गया।
और पता नहीं क्यों, जितनी देर वो मेरी गोदी में था,
ऐसा लग रहा था जैसे दुनिया में कोई परेशानी है ही नहीं।

उसकी छोटी-छोटी उंगलियाँ…
कभी शीशे की तरफ इशारा करतीं,
कभी हवा को पकड़ने की कोशिश करतीं।
उसकी गर्दन बार-बार घूमती,
हर चीज़ को ऐसे देख रहा था जैसे पहली बार दुनिया देख रहा हो।

और उसकी हँसी…

इतनी सच्ची।
इतनी हल्की।
इतनी मासूम।

उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे जिंदगी अचानक धीमी हो गई हो।
जैसे दुनिया में अभी भी बहुत कुछ सुंदर बाकी है।

उसे शायद बस गाड़ी में बैठना अच्छा लग रहा था।
लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसकी आँखों से दुनिया देख रही हूँ।

फिर ऑफिस आया।
मैं उतरने लगी।
और जैसे ही मैं गाड़ी से बाहर निकली, वो रोने लगा।

वो अपने डैडी की गोदी में तो चला गया,
पर उसकी आँखें जैसे कह रही थीं—
“मम्मा, मत जाओ ना…”

मैंने मुस्कुराकर कहा,
“मम्मा शाम को मिलेगी।”

पर सच कहूँ…
उस पल दिल थोड़ा वहीं रह गया था।

फिर मैं ऑफिस के अंदर गई।
गार्ड ने मुस्कुराकर कहा,
“मैडम, उसको भी ले आतीं।”

और पता नहीं क्यों…
उसकी ये छोटी सी बात पूरे दिन मेरे दिल में गूंजती रही।

ऐसा लगा जैसे वो सिर्फ एक बात नहीं थी।
जैसे किसी ने मेरे मन के अंदर चल रही सारी बातें पढ़ ली हों।

मैंने गार्ड को देखा।
दिन भर वहीं खड़े रहना।
सबके आईडी कार्ड चेक करना।
लोग आते हैं, जाते हैं…
और शायद इसी बीच उसने अपना फोन उठाकर कुछ देखा।

ऐसा लगा जैसे वो अपने बच्चे की फोटो देख रहा हो।
शायद उसे याद कर रहा हो।
शायद सोच रहा हो कि कब उसका बच्चा इतना बड़ा हो गया।

तभी अचानक दिल में एक बात आई—

बचपन सच में बहुत छोटा होता है।

इतना छोटा कि हम उसे जीने की तैयारी ही करते रह जाते हैं,
और वो चुपचाप आगे निकल जाता है।

आजकल हम सब किसी ना किसी दौड़ में भाग रहे हैं।
कमाने की दौड़।
फोन की दौड़।
बेहतर बनने की दौड़।

और इसी भागदौड़ में कई बार हम अपने बच्चों को “देखना” भूल जाते हैं।

सिर्फ उनके साथ होना काफी नहीं होता।
उन्हें महसूस करना पड़ता है।
उनकी छोटी-छोटी खुशियों में रुकना पड़ता है।

क्योंकि एक दिन यही पल फोटो बन जाते हैं।
और फिर हम उन्हें फोन में खोलकर देखते हैं…
और सोचते हैं—

“काश उस दिन थोड़ा और रुक जाते।”

पर शायद जिंदगी की खूबसूरती यही है।

कुछ पल गुजर जाते हैं,
पर उनकी गर्माहट हमेशा हमारे अंदर रह जाती है।

और फिर किसी साधारण सी सुबह में…
एक छोटी सी कार राइड,
एक मासूम हँसी,
और एक बच्चे की भीगी आँखें
हमें याद दिला जाती हैं—

कि दुनिया में सबसे खूबसूरत चीज़
अब भी “अपनों के साथ बिताया हुआ समय” है।


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Author: Onesha

She is the funny one! Has flair for drama, loves to write when happy! You might hate her first story, but maybe you’ll like the next. She is the master of words, but believes actions speak louder than words. 1sha Rastogi, founder of 1shablog.com.

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