Part 27

Bir से लौटते हुए Ananya पूरे रास्ते चुप नहीं रही।

कभी वह paragliding की video देखती, कभी अपनी photos में से कोई चुनकर मुझे दिखाती, कभी अचानक किसी मोड़ पर बाहर देखने लगती और फिर बिना किसी connection के कोई पुरानी बात याद करके हँसने लगती।

उसकी खुशी पूरे car में फैली हुई थी।

मैं drive कर रहा था, लेकिन बार-बार मेरी नज़र उसकी तरफ़ चली जाती।

“तुम road देखो,” उसने phone से नज़र हटाए बिना कहा।

“देख रहा हूँ।”

“Road या मुझे?”

“दोनों।”

“तुम्हें accident करवाना है?”

“तुम्हें मेरी driving पर भरोसा नहीं है?”

“तुम्हारी driving पर है। तुम्हारे ध्यान पर नहीं।”

मैं मुस्कुराया।

कुछ देर बाद उसने अपना phone मेरी तरफ़ बढ़ाया।

“ये photo रखूँ?”

मैंने एक नज़र देखी। वह हवा में उड़ने से कुछ मिनट पहले की photo थी। बाल चेहरे पर थे, आँखों में डर था, लेकिन वह उसे छुपाने के लिए हँस रही थी।

“ये वाली।”

“इसमें मैं डर रही हूँ।”

“इसीलिए अच्छी है।”

“मुझे डरते हुए अच्छा दिखना पसंद नहीं।”

“तुम डरते हुए भी अच्छी लगती हो।”

उसने phone वापस ले लिया।

“तुम आज बहुत बोल रहे हो।”

“तुम्हारे साथ रहकर सीख रहा हूँ।”

“तो अभी बहुत काम बाकी है।”

Dharamshala लौटते-लौटते शाम उतरने लगी थी। आसमान का रंग धीरे-धीरे हल्का नीला होकर धूसर हो रहा था। पहाड़ों पर घरों की lights एक-एक करके जल रही थीं। Ananya खिड़की से बाहर देखती रही और जब हम घर के पास पहुँचे तो उसने अचानक कहा,

“आज dinner मैं बनाऊँगी।”

मैंने उसकी तरफ़ देखा।

“तुम्हें आता है?”

“हाँ।”

“क्या?”

“Maggi।”

“वो खाना नहीं, emergency response है।”

“तुम बहुत judge करते हो।”

“मैं बस सच बोलता हूँ।”

“फिर आज सच खा लेना।”

रसोई में उसने सच में Maggi बनाई। दो मसाले डाले। फिर तीसरा डालने लगी तो मैंने उसका हाथ रोक लिया।

“तुमने कहा था दो।”

“आज special occasion है।”

“किस बात का?”

वह कुछ seconds मुझे देखती रही।

“हम Bir से वापस आ गए।”

“ये special occasion है?”

“हाँ।”

“तुम्हारी खुशी के standards बहुत low हैं।”

“तुम्हारे high हैं?”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

वह stove के सामने खड़ी थी। बाल उसने जल्दी में बाँध लिए थे, लेकिन कुछ लटें फिर भी उसके चेहरे के पास आ गयी थीं। वह बीच-बीच में spoon से noodles उठाकर चखती और हर बार कहती कि अभी नमक कम है।

आख़िर में उसने bowl मेरे सामने रखा।

“बताओ।”

मैंने एक bite लिया।

“अच्छी है।”

“सच?”

“हाँ।”

“तुमने ठीक से चखा भी नहीं।”

“तुम्हारे हाथ की है। अच्छी होगी।”

वह मेरी तरफ़ देखने लगी।

“तुम्हें पता है, कभी-कभी तुम ऐसी बातें बोल देते हो जो बहुत dangerous होती हैं।”

“जैसे?”

“जैसे मैं उन्हें याद रख लेती हूँ।”

उसकी बात के बाद हम दोनों कुछ देर चुप रहे।

बाहर हवा चल रही थी। Window के glass पर हल्की नमी जमा होने लगी थी। कमरे में सिर्फ़ kitchen light थी और उसके नीचे Ananya का चेहरा बाकी घर से थोड़ा ज़्यादा साफ़ दिखाई दे रहा था।

मैंने bowl उसकी तरफ़ बढ़ाया।

“तुम भी खाओ।”

“मैंने खाया है।”

“तुमने चखा है।”

“Difference?”

“तुम्हें पता है।”

वह मेरे सामने बैठ गयी। हम दोनों ने एक ही bowl से Maggi खायी। बीच-बीच में उसके हाथ मेरे हाथ से छूते रहे। हर बार हम दोनों में से कोई कुछ नहीं कहता।

यह अजीब था कि रात पहले से ज़्यादा साधारण थी, लेकिन उसके भीतर intimacy कहीं ज़्यादा थी।

शायद प्यार हमेशा बड़े moments में नहीं आता।

कभी-कभी वह एक ही bowl से खाना खाते हुए चुप रहने में आ जाता है।

रात थोड़ी और गहरी हुई तो मैं terrace पर चला गया। Phone पर Tokyo की mail आयी थी। Flight confirmation, reporting date, documents की list—सब कुछ साफ़ और व्यवस्थित था।

मेरी ज़िन्दगी हमेशा की तरह मुझे वापस अपनी जगह बुला रही थी।

मैंने mail दोबारा पढ़ी।

फिर तीसरी बार।

“क्या हुआ?”

Ananya मेरे पीछे आकर खड़ी थी।

मैंने phone screen बंद कर दी।

“कुछ नहीं।”

“आज तुम्हारा कुछ नहीं वाला answer नहीं चलेगा।”

मैं मुस्कुराया नहीं।

वह मेरे पास आकर railing के सहारे खड़ी हो गयी।

“Flight?”

“हाँ।”

“कब की?”

“अगले हफ़्ते।”

उसने सिर हिलाया।

जैसे उसे यह पहले से पता था, लेकिन सुनना फिर भी ज़रूरी था।

“तुमने मुझे बताया नहीं।”

“तुमने पूछा नहीं।”

“मैं हर बार पूछूँ?”

“नहीं।”

“फिर?”

मैं उसकी तरफ़ मुड़ा।

“मैं नहीं चाहता था कि आज का दिन उस mail के साथ शुरू हो।”

“और अब?”

“अब हो गया।”

वह कुछ seconds valley की तरफ़ देखती रही।

“तुम्हें डर लग रहा है?”

“हाँ।”

“Japan से?”

“नहीं।”

“मुझसे?”

“तुमसे भी नहीं।”

“तो?”

मैंने phone railing पर रख दिया।

“अपने उस version से जो वहाँ जाकर तुम्हें miss करेगा और फिर खुद को समझाएगा कि ये practical नहीं है।”

उसने मेरी ओर देखा।

“तुम खुद को बहुत समझाते हो।”

“कोई तो समझाएगा।”

“मैं हूँ।”

“तुम मुझे confuse करती हो।”

“तुम पहले से confused हो।”

मैं हल्का-सा हँसा, लेकिन वह हँसी ज़्यादा देर नहीं रही।

कुछ देर बाद Ananya ने पूछा,

“Saba के बाद तुम ऐसे ही हो गए थे?”

उसका नाम सुनते ही मेरे भीतर कुछ पुराना खुल गया।

हवा वही थी, रात वही थी, सामने पहाड़ वही थे। लेकिन कुछ names जगह बदल देते हैं। वे कमरे में दिखाई नहीं देते, फिर भी उनके आने से बाकी सारी चीज़ें अलग दिखने लगती हैं।

“शायद,” मैंने कहा।

“शायद?”

“मुझे बहुत कुछ ठीक से याद नहीं।”

“या याद है लेकिन बोलना नहीं चाहते?”

मैंने railing से हाथ हटा लिया।

“Saba के जाने के बाद मुझे लगा था कि मैं सब समझता हूँ। कि अगर कोई चला गया है तो उसके पीछे भागने से कुछ नहीं बदलेगा। कि लोग अपनी ज़िन्दगी चुनते हैं और तुम्हें भी अपनी चुननी चाहिए।”

“उसने तुम्हें छोड़ा था?”

“हम दोनों ने एक-दूसरे को छोड़ा था।”

“Difference?”

“बहुत।”

वह चुप रही।

मैंने सामने अँधेरे में देखते हुए कहा,

“वो जाना चाहती थी। मैं रोक सकता था शायद। लेकिन मैंने नहीं रोका।”

“क्यों?”

“क्योंकि मुझे लगा प्यार का मतलब किसी को रोकना नहीं होता।”

“और अब?”

“अब लगता है, कभी-कभी लोग चाहते हैं कि तुम उन्हें रोकने की कोशिश तो करो।”

Ananya ने मेरी तरफ़ देखा।

“तुमने कोशिश नहीं की?”

“मैंने उसे जाने दिया।”

“और फिर?”

“फिर मैंने उस decision को maturity का नाम दे दिया।”

वह कुछ नहीं बोली।

“काफ़ी समय तक मैं खुद को समझाता रहा कि मैं strong हूँ। कि मैंने उसे freedom दी। कि मैंने अपने emotions को control किया। लेकिन सच ये था कि मैं डर गया था।”

“किस बात से?”

“अगर मैं उससे कहता कि मत जाओ और वह फिर भी चली जाती, तो मैं क्या करता?”

Ananya की आँखें धीरे-धीरे नरम हुईं।

“तो तुमने कोशिश ही नहीं की।”

“हाँ।”

“ताकि हारना न पड़े।”

“हाँ।”

हवा ने उसके बाल चेहरे पर ला दिए। उसने उन्हें हटाया नहीं।

“और अब तुम मेरे साथ भी वही कर रहे हो?”

उस सवाल ने मुझे उसकी तरफ़ पूरी तरह मोड़ दिया।

“नहीं।”

“तुमने कहा कोई promise नहीं होगा।”

“क्योंकि मैं तुम्हें ऐसा promise नहीं देना चाहता जिसे निभाने के डर में तुम मेरे साथ बिताए ये दिन भूल जाओ।”

“और अगर मुझे promise चाहिए?”

“तो मैं भागूँगा नहीं।”

“अगर मैं कहूँ कि मुझे डर लग रहा है?”

“तो मैं सुनूँगा।”

“अगर मैं कहूँ कि मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती?”

मेरे पास तुरन्त कोई जवाब नहीं था।

वह हल्का-सा मुस्कुरायी।

“देखा? यही problem है।”

“नहीं।”

मैं उसके करीब गया।

“Problem ये है कि मैं answer सोचकर देता हूँ। तुम चाहती हो मैं पहले महसूस करूँ।”

उसकी आँखें मेरी आँखों पर टिक गयीं।

“और?”

“और मुझे तुम्हें खोना नहीं है।”

उसका चेहरा बहुत धीरे बदल गया।

“ये promise है?”

“नहीं।”

“तो क्या है?”

“सच।”

वह कुछ seconds मुझे देखती रही।

फिर मेरी shirt के पास उँगलियाँ रख दीं।

“तुम्हें पता है, Saba और मेरे बीच सबसे बड़ा difference क्या है?”

मैंने सिर हिलाया।

“तुम मुझे उसके खिलाफ़ measure मत करो।”

“मैं नहीं कर रहा।”

“करते हो।”

“कभी-कभी।”

“मत करो।”

उसकी आवाज़ में पहली बार irritation थी।

मैंने हाथ पीछे कर लिए।

“Sorry।”

“मैं Saba नहीं हूँ, Sugandh।”

“मुझे पता है।”

“नहीं। तुम्हें पता होना चाहिए।”

मैं चुप रहा।

“मैं तुम्हें छोड़कर किसी और ज़िन्दगी में नहीं जा रही,” उसने कहा। “लेकिन मैं तुम्हारे साथ अपनी ज़िन्दगी रोकूँगी भी नहीं। मैं तुम्हारे डर का इलाज बनने नहीं आयी हूँ।”

उसकी बात सुनकर मुझे पहली बार लगा कि शायद मैं उससे कुछ माँग रहा था, बिना माँगे।

उसकी presence मेरे लिए healing थी। लेकिन उसे अपनी healing का ज़िम्मेदार बना देना unfair होता।

“तुम सही कह रही हो,” मैंने कहा।

“मुझे सही होना पसंद नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि फिर तुम्हें चुप कराना मुश्किल हो जाता है।”

मैं मुस्कुराया।

वह भी।

कुछ seconds बाद उसने अपना माथा मेरे chest पर रख दिया।

मैंने उसे बाँहों में भर लिया।

उसका शरीर मेरे पास था, लेकिन इस बार हमारी closeness में कल रात वाली जल्दबाज़ी नहीं थी। वहाँ एक तरह की सावधानी थी। जैसे हम दोनों जानते थे कि अब सिर्फ़ एक-दूसरे को चाहना काफी नहीं होगा—हमें एक-दूसरे को समझना भी पड़ेगा।

“Ananya,” मैंने उसके बालों के पास कहा।

“Hm?”

“अगर तुम चाहो तो आज मैं यहीं बैठा रहूँगा। कुछ नहीं होगा।”

उसने सिर उठाया।

“तुम इतने अच्छे बनने की कोशिश मत करो।”

“मैं कोशिश नहीं कर रहा।”

“फिर?”

“पूछ रहा हूँ।”

वह मेरी आँखों में देखने लगी।

फिर उसने मेरे collar को पकड़कर मुझे अपनी ओर खींच लिया।

“आज कोई lecture नहीं।”

“ठीक है।”

“और कोई overthinking नहीं।”

“मुश्किल है।”

“तो मैं रोक दूँगी।”

“कैसे?”

उसने जवाब में मुझे kiss कर दिया।

इस बार kiss कल रात से अलग थी। उसमें पहली बार की बेचैनी नहीं थी। उसमें आज के दिन की हँसी थी, car की लंबी drive थी, उसके हाथ में camera था, Bir की हवा थी और वह conversation भी थी जिसमें हमने अपने डर को एक-दूसरे से छुपाने के बजाय table पर रख दिया था।

उसके हाथ मेरी गर्दन के पीछे चले गए। मैंने उसकी कमर पकड़कर उसे अपने करीब किया। उसने एक पल के लिए kiss रोककर मेरी आँखों में देखा।

“ठीक हो?”

मैंने सिर हिलाया।

“तुम?”

“पूछना बंद करो।”

“तुमने कहा था बोल देना।”

“तो बोल रही हूँ।”

वह फिर मेरे करीब आ गयी।

हम धीरे-धीरे room तक आए। उसने दरवाज़ा पीछे से बन्द किया। बाहर पहाड़ और हवा थे, भीतर हल्की पीली रोशनी।

मैंने उसकी हथेली अपने चेहरे पर रखी।

“तुम्हें पता है,” मैंने कहा, “मैंने तुम्हें बहुत बार दूर से देखा था।”

“Office में?”

“Office में। Cafeteria में। Kusha की शादी में। तुम्हारे resignation के दिनों में।”

“और कुछ कहा नहीं।”

“नहीं।”

“कायर।”

“हाँ।”

“अब?”

“अब भी।”

वह मुस्कुरायी।

“लेकिन अब थोड़ा कम।”

उसने मेरी cheek पर kiss किया। फिर jawline पर। उसकी उँगलियाँ मेरी shirt के buttons के पास आकर रुक गयीं।

इस बार कोई जल्दी नहीं थी।

हम दोनों बार-बार एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे। जैसे हर touch के बाद यह confirm कर रहे हों कि दूसरा अभी भी यहीं है।

उसने धीरे से पूछा,

“अगर मैं रुक जाऊँ?”

“तो हम रुक जाएँगे।”

“और अगर तुम रुक गए?”

“तो तुम पूछ लेना।”

“तुम्हें हर चीज़ पूछनी क्यों पड़ती है?”

“क्योंकि इस बार मैं assume नहीं करना चाहता।”

उसका चेहरा नरम पड़ गया।

“Good.”

उसने फिर मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया।

बाहर हवा खिड़की के glass से टकरा रही थी। कमरे की light आधी जल रही थी। उसके बाल मेरी उँगलियों में थे और उसका चेहरा इतना करीब कि मुझे उसकी आँखों का रंग साफ़ दिखाई दे रहा था।

हमारे बीच की दूरी धीरे-धीरे खत्म होती गयी।

उस रात हमने कोई future तय नहीं किया। कोई promise नहीं बनाया। Saba और Japan हमारे बीच मौजूद थे, लेकिन पहली बार वे हमारे बीच दीवार बनकर नहीं खड़े थे।

हमने बस एक-दूसरे को अपने पास रहने दिया।

इतना पास कि डर भी साथ था और सुकून भी।

इतना पास कि मैं अपने भीतर की सारी सावधानियाँ कुछ देर के लिए भूल गया।

और जब हम थककर एक-दूसरे के पास लेटे, Ananya ने अपना सिर मेरे shoulder पर रख दिया।

“कल क्या करेंगे?” उसने पूछा।

“तुम्हें जहाँ जाना हो।”

“तुम्हें?”

“तुम्हारे साथ।”

“बहुत safe answer है।”

“मैं सीख रहा हूँ।”

वह कुछ seconds चुप रही।

फिर मेरी छाती पर उँगली से कुछ बनाते हुए बोली,

“तुम्हें पता है, मैं तुम्हारे साथ future नहीं माँग रही।”

“मुझे पता है।”

“मैं सिर्फ़ ये चाहती हूँ कि जब future हमारे बीच आए, तो तुम उससे पहले ही भागो मत।”

मैंने उसकी उँगलियाँ पकड़ लीं।

“इस बार नहीं भागूँगा।”

वह मेरी तरफ़ मुड़ी।

“ये promise है?”

मैंने कुछ सोचा।

फिर कहा,

“नहीं। कोशिश है।”

वह मुस्कुरायी।

“ये ज़्यादा honest है।”

उसने आँखें बन्द कर लीं।

मैंने उसके माथे पर kiss किया।

कुछ देर बाद उसकी साँसें फिर धीमी हो गयीं।

मैं जागता रहा।

उसके बालों की हल्की ख़ुशबू, उसकी हथेली की गर्माहट और बाहर पहाड़ों पर उतरती रात को महसूस करता रहा।

चार दिन अब भी चार दिन ही थे।

Japan अब भी था।

Saba अब भी मेरी कहानी का हिस्सा थी।

लेकिन Ananya मेरे पास सो रही थी।

और उस रात, पहली बार, मुझे लगा कि शायद healing का मतलब किसी पुराने इंसान को भूल जाना नहीं होता।

शायद healing का मतलब यह होता है कि कोई नया इंसान तुम्हारे डर के सामने खड़ा होकर भी तुमसे यह नहीं कहता कि उसे बचाओ।

वह सिर्फ़ कहता है—

मुझसे सच बोलो।

और फिर भी वहीं रहता है।


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Author: Onesha

She is the funny one! Has flair for drama, loves to write when happy! You might hate her first story, but maybe you’ll like the next. She is the master of words, but believes actions speak louder than words. 1sha Rastogi, founder of 1shablog.com.

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