मैंने अपना phone उठाया, तो उसकी profile picture पर आकर मेरी नज़र ठहर गई। इतने सालों बाद भी, महज़ उसका चेहरा देखते ही एक पुरानी, दबी हुई याद मेरे दिल में ऐसे लौट आई, जैसे वो कभी गई ही न हो।
कल रात club में Sugandh को अचानक सामने देखना… और उसका उसी पुरानी नज़र से मेरी तरफ देखना। फिर बिना कुछ कहे, बड़ी सहजता से मेरे चेहरे पर आई लट को धीरे से कान के पीछे कर देना—उस एक छोटे-से touch ने मुझे अंदर तक हिला दिया था। It was a glitch in the space-time continuum. एक पल के लिए लगा जैसे बीच के सारे साल किसी ने मिटा दिए हों। जैसे हम कभी अलग हुए ही न हों। वो स्पर्श एक ज़बरदस्त flashback की तरह मुझे सीधे अतीत के उस आख़िरी पन्ने पर ले गया—जो मेरे farewell की रात थी। As usual पूरा office बाहर celebrate कर रहा था; वही music, वही lights, वही drinks, वही हँसी… सब कुछ पहले जैसा था, बस हम दोनों पहले जैसे नहीं रहे थे।
Amsterdam से वापस आने के बाद Sugandh बदल गया था। बहुत नहीं… बस इतना कि अब वो मुझे notice करने लगा था। पहले उसकी नज़र मुझसे होकर निकल जाती थी, अब कुछ पल ठहर जाती थी। मैं कई दिनों से ये महसूस कर रही थी। And honestly… मुझे अच्छा भी लग रहा था, शायद बहुत अच्छा। लेकिन उसी के साथ एक अजीब-सी confusion भी थी कि आख़िर वो चाहता क्या है।
उसका वो charisma, उसका शांत रहना, और बहुत कम बोलना—ये सब मुझे अपनी तरफ खींचता चला जाता था। Office में सबकी नज़रें अक्सर मुझ पर होती थीं… लेकिन मेरी नज़र हमेशा उसे ढूँढ़ती रहती थी। Kusha की शादी में मैंने पहली बार हिम्मत करके उससे पूछ भी लिया था—”मेरे साथ try क्यों नहीं किया?” उसने हमेशा की तरह मुस्कुराकर बात टाल दी। शायद उसे लगा मैं मज़ाक कर रही हूँ, या शायद उसने मेरी बात को कभी seriously लिया ही नहीं। लेकिन मैं… मैं उससे जुड़ी हर छोटी-से छोटी बात याद रखती थी।
Amsterdam में रहते हुए मैं उसकी हर नई photo देखती थी। उसकी profile हमेशा public रहती थी। वो किस city में है, किस सड़क पर चल रहा है, किस café में बैठा है… मैं सब देखती थी। मुझे नहीं पता मैं क्या ढूँढ़ती थी। Perhaps I was looking for a version of him that belonged to me—शायद उसके चेहरे की वो मुस्कान, जो बिना किसी कोशिश के मेरे पूरे दिन को अच्छा बना देती थी।
उसकी आँखों में हमेशा एक अजीब-सी गर्माहट थी। वो बाहर से जितना composed दिखता था, मुझे हमेशा लगता था उसके अंदर उतना ही शोर है। मैं उसकी ज़िंदगी के बारे में सब कुछ जान लेना चाहती थी। उसकी favourite coffee क्या है, ये नहीं… उसके डर क्या हैं। उसके दिल पर कितने ज़ख्म हैं। वो किस बात से भागता है। उसे देखकर अक्सर मन करता था कि बस एक बार उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर कह दूँ, “You’re safe… अब कहीं भागने की ज़रूरत नहीं है।” पर मैं जानती थी कि अगर मैं उसकी तरफ एक कदम भी जल्दी बढ़ाऊँगी, तो वो फिर वही करेगा जो हमेशा करता आया था—खुद को मुझसे दूर कर लेगा।
Office में उसके बारे में कहानियाँ बहुत थीं। लोग उसे playboy कहते क्योंकि वो अच्छा दिखता था, confident था, और लड़कियाँ खुद आकर उससे बात करती थीं। पर मैंने उसके भीतर हमेशा एक अजीब-सी दूरी महसूस की। वो लोगों के बीच रहकर भी खुद को हमेशा थोड़ा-सा बचाकर रखता था। Instagram पर उसकी profile खोलती तो comments, likes, photos… लड़कियाँ ही लड़कियाँ दिखाई देतीं। तब दिल बैठ जाता और मैं खुद से कहती, “इतने लोगों के बीच मैं कौन हूँ?” ऐसा लगता जैसे उसकी चमकती दुनिया में, मैं बस एक invisible-सी मौजूदगी हूँ, जिसका शायद उसे नाम भी याद हो या ना हो।
लेकिन मेरा notice period शुरू होने के बाद पहली बार मैंने उसके अंदर एक अजीब-सी बेचैनी देखी। अब जाने-अनजाने उसकी नज़र मेरी तरफ चली आती थी। कभी किसी बहाने मेरी bay तक आ जाना, तो कभी पानी भरने के लिए वही समय चुनना जब मैं उठती थी। मुझे आज भी याद है, एक दिन मैं अपनी screen पर काम कर रही थी और बिना सिर उठाए ही मुझे महसूस हो गया कि वो सामने खड़ा है। मैंने ऊपर देखा, वो हाथ में एक document लिए सचमुच वहीं था। हमारी आँखें बस एक पल के लिए मिलीं, वो मुस्कुराया भी नहीं और वापस चला गया। पर उस एक नज़र ने मेरा पूरा दिन बदल दिया था।
उसकी presence का असर मैं कभी शब्दों में समझा ही नहीं पाई। वो मेरे पास से गुज़रता था और उसके चले जाने के बाद भी हवा में उसका एहसास रह जाता था। ज़िंदगी में attraction पहले भी हुआ था, crush भी हुए थे, लोग अच्छे भी लगे थे… लेकिन Sugandh के साथ बात अलग थी। उसे देखते ही मुझे सिर्फ उसे छू लेने का मन नहीं करता था, उसके पास बैठ जाने का, उसकी ख़ामोशी सुनने का, उसके कंधे पर सिर रखकर देर तक बैठे रहने का मन करता था। उससे कुछ माँगे बिना उसे इस कदर चाहना ही सबसे scariest part था।
कई बार office के बाहर मैंने उसे Kusha के साथ देखा था। दोनों साथ चाय पीते, smokers’ zone के पास खड़े होकर लंबी बातें करते। बाहर से देखने पर लगता कि दोनों सिर्फ़ अच्छे दोस्त हैं, पर मुझे हमेशा महसूस होता था कि उनके बीच कुछ ऐसा है जो बाकी लोगों को दिखाई नहीं देता। उस एहसास से मुझे जलन नहीं होती थी, बस एक हल्की-सी कसक होती थी कि मैं कभी उसके इतने करीब पहुँच ही नहीं पाई कि उसकी ख़ामोशियों का हिस्सा बन सकूँ।
और फिर वो आख़िरी रात आ गई। Formal farewell वहीं ख़त्म हो गया था। Cake, photos, speeches… सब office की चार दीवारों के अंदर रह गया। लेकिन असली farewell अभी बाकी था। हमारी छोटी-सी gang हमेशा की तरह restaurant पहुँची। हर तरफ रोहित की ऊँची हँसी, सम्यक का DJ से गाने बदलवाना, नेहा की table arrangements, और glasses टकराने की आवाज़ का शोर था। पर उस पूरे शोर में मेरी नज़र बार-बार सिर्फ़ एक ही चेहरे को ढूँढ़ रही थी।
Sugandh थोड़ा दूर बैठा था, हमेशा की तरह सबसे अलग। हाथ में beer की bottle थी, और उसकी आँखें बार-बार भीड़ के उस हिस्से तक चली आती थीं जहाँ मैं बैठी थी। हर बार जब मेरी नज़र उसकी तरफ़ उठती, वो नज़रें चुराकर किसी और से बात करने लगता। इतना confident दिखने वाला लड़का… और नज़र मिलते ही बिल्कुल चुप—मुझे हमेशा अंदर ही अंदर हँसा देता था।
पूरी शाम हमारे बीच कोई ढंग की बात नहीं हुई, फिर भी ऐसा लगा जैसे हम दोनों के बीच लगातार कोई ख़ामोश बातचीत चल रही हो। मैंने दूसरी beer मँगा ली। Neha ने मेरी तरफ़ देखकर हँसते हुए कहा, “आज तो लगता है जाने का पूरा ग़म निकालने का इरादा है।” मैं हँस तो दी, पर सच ये था कि मैं नौकरी छोड़ने का ग़म नहीं मना रही थी; मैं उस इंसान से दूर जाने का ग़म पी रही थी, जिसके इतने पास होकर भी मैं कभी उसके पास पहुँच ही नहीं पाई।
रात गहराने के साथ मेरा होश धुँधलाने लगा। शराब के असर ने इतने सालों से दबे हुए एहसासों के शोर को बढ़ा दिया था। लोग एक-एक करके उठने लगे थे, कोई bill की बात कर रहा था, कोई cab book कर रहा था। जब मैं कुर्सी से उठी, तो मेरे कदम लड़खड़ा गए।
And then, the universe shifted.
अगले ही पल किसी ने मुझे संभाल लिया। वो Sugandh था। उसने कुछ नहीं कहा, बस उतनी ही मजबूती से मुझे थामे रखा, जितनी ज़रूरत थी। उसकी हथेली की पकड़ में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, कोई अधिकार नहीं था… बस एक सुकून था जिसे महसूस करते ही मेरी आँखें भर आई थीं।
रास्ते भर सन्नाटा था। वो बीच-बीच में बस इतना पूछ लेता, “ठीक हो?” और मैं हर बार सिर हिलाकर “हाँ” कह देती, जबकि हम दोनों जानते थे कि मैं ठीक नहीं थी। मेरी हालत देखकर उसने रास्ता बदल दिया और मुझे अपने घर ले आया। उस रात उसने जिस तरह बेहद patient होकर मेरी देखभाल की—पानी रखना, नींबू पानी बनाना, बार-बार यह देखना कि मैं ठीक हूँ या नहीं—उसने मेरे मन में बनी उसकी बेपरवाह image को हमेशा के लिए बदल दिया। He was caring, in ways I never imagined him to be.
मैं आधी नींद में उसे देख रही थी। उसके चेहरे पर वही शांति थी, लेकिन उस रात पहली बार उसमें एक soft side दिखाई दिया, जो उसने शायद कभी किसी को नहीं दिखाया था। मैंने जाने-अनजाने उसका हाथ पकड़ लिया। उसने मेरी तरफ देखा; उसकी आँखों में सवाल भी था और अपनापन भी। उस पल बिना कुछ सोचे, मैं थोड़ा-सा उसकी तरफ झुकी और बहुत हल्के से उसके गाल को छू लिया।
वो कुछ पल बिल्कुल स्थिर रहा। फिर उसने बहुत सँभलकर मेरे चेहरे को अपनी हथेलियों में ले लिया। उसकी उँगलियाँ भले ही शांत थीं, पर उसकी भारी साँसें बता रही थीं कि वो भी उतना ही बेचैन था। हमारे बीच बस कुछ inch की दूरी रह गई थी। शब्द हमारा साथ छोड़ चुके थे। उसने बहुत धीरे से अपना माथा मेरे माथे से टिका दिया, और मैंने आँखें बंद कर लीं। इतने सालों की दूरी उस एक स्पर्श में पिघलने लगी थी।
तभी उसकी हथेलियाँ मेरे गालों से फिसलती हुई मेरी गर्दन पर रुक गईं। जब उसके होंठों ने पहली बार मेरे होंठों को छुआ, तो वो सिर्फ एक kiss नहीं थी—ऐसा लगा जैसे वक्त वहीं रुक गया हो। उस kiss में सालों का इंतज़ार, एक अधूरी ख़्वाहिश और उसे खो देने का डर सब एक साथ घुला हुआ था। मैंने उसके कंधों को कसकर पकड़ लिया। उसने मुझे और करीब खींचते हुए, मेरी दोनों कलाइयों को अपने एक हाथ में थामा और बहुत प्यार से मुझे दीवार की तरफ़ pin कर दिया।
कमरे की dim light में उसकी shirt अब उतर चुकी थी। His chest was rising and falling while he was breathing heavily against mine. वो एकदम चुप था, पर उसकी गहरी आँखें मेरे चेहरे के एक-एक हिस्से को ऐसे पढ़ रही थीं जैसे कोई आख़िरी ख़त हो। मेरी उँगलियाँ घबराहट में मेरी chain के pendant से खेलने लगीं—मेरी वो पुरानी आदत जो सिर्फ़ उसके ख़्यालों में जागा करती थी। उसने बहुत धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर मेरे pendant को सहलाया और मेरी उँगलियों को अपने हाथ में lock कर दिया।
जब उसका चेहरा दोबारा करीब आया, तो उसकी घनी पलकों का मेरे गालों को छूना और उसकी गरम सांसें मेरे होठों पर बिखरना मुझे अपनी ही सुध-बुध भुला रहा था। उसके होंठ मेरी आँखों के कोनों को चूमते हुए, मेरे कान के पीछे और गर्दन पर उतर आए। उसकी बंद आँखों और गरम सांसों के साथ गर्दन पर kisses की एक ऐसी गहरी, intense trail बन रही थी जिसने मेरी पूरी body में एक सिहरन दौड़ा दी।
कमरे के सन्नाटे में हमारी टूटती-जुड़ती सांसों के अलावा कोई और आवाज़ नहीं थी। Our bare skin met like a long-awaited confession. उसके शरीर की वो बेकाबू warmth और bare skin जब मुझसे touch हुई, तो मेरा सारा control जैसे खत्म हो गया। उसने मुझे बहुत आराम से, जैसे मैं कोई काँच की चीज़ हूँ, अपनी बाहों में उठाया और bed पर ले गया।
उस रात हमारे बीच कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। हर एक touch इतना धीमा, इतना गहरा था कि बिस्तर की सिलवटों में हमारी कहानियाँ दर्ज हो रही थीं। जब उसने झुककर मुझे अपनी बाहों में लिया, तो a beautiful, seamless melting of boundaries was happening. दो भटकती हुई रूहें सदियों के सफ़र के बाद आख़िरकार अपने सही ठिकाने पर आ मिली थीं। उसकी उँगलियों का मेरी कमर को छूना और मेरा उसकी छुअन के आगे पूरी तरह surrender कर देना… सब कुछ इतना perfect था कि मेरी आँखों से एक आंसू फिसलकर तकिए में गायब हो गया। वो lust से परे, एक ऐसी ‘once in a lifetime’ वाली रात थी, जहाँ हम दोनों एक-दूसरे में इस तरह खो रहे थे कि जिस्म और रूह का फर्क ही मिट गया था।
बाक़ी रात मेरी यादों में शब्दों की तरह नहीं, एहसासों की तरह बस गई। मुझे सिर्फ़ इतना याद है कि बहुत समय बाद मुझे किसी के साथ पूरी तरह safe महसूस हुआ था। और शायद… उसी चरम सुकून ने मुझे सबसे ज़्यादा डरा दिया था।
सुबह जब कमरे में हल्की-सी धूप उतरी, मैं कुछ देर उसे सोते हुए देखती रही। जागते हुए जो तनाव उसके चेहरे पर रहता था, इस वक़्त वहाँ सिर्फ एक मासूम सुकून था। मैं मुस्कुराई, बहुत धीरे से उठी, एक आख़िरी बार उसे देखा… और बिना उसे जगाए वहाँ से चली आई।
मैं डर गई थी। मुझे पता था कि अगर वो जाग गया, और उसने एक बार भी मुझे रोक लिया… तो शायद मैं कभी जा ही नहीं पाऊँगी।
Flashback की वो सुनहरी धुंध अचानक टूटी, और मैं वापस आज की हक़ीक़त में आ गई। कल रात की उस club वाली मुलाकात में, जब उसने मेरी लट को पीछे किया था, इस बार उसने आँखें झुकाई नहीं थीं। वो सीधे मेरी आँखों में देख रहा था।
हमारी नज़रें मिलीं। ना वो मुस्कुराया, ना मैं। लेकिन उस एक पल के सन्नाटे में मुझे लगा जैसे हम दोनों के बीच जितनी भी बातें कभी नहीं हुईं, वो सब हमारी आँखें एक-दूसरे से कह रही थीं। And maybe… just maybe… यही ख़ामोशी मुझे उससे सबसे ज़्यादा मोहब्बत करवा चुकी थी।
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